यूपी एटीएस ने जिस संदिग्ध आतंकी मुदस्सिर को गिरफ्तार किया है। उसके परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक विश्वास नहीं हो रहा है कि बेटे पर इतने गंभीर आरोप भी लग सकते हैं। वह नहीं जानते क्या हुआ है और आगे जो भी होगा वो कुदरत को मंजूर है। उन्हें तो सिर्फ यह पता था कि मुदस्सिर ज्वालापुर में रहकर बाइक से कपड़ों की फेरी लगाता था।
लखनऊ एटीएस ने अभियान चलाकर आतंकी संगठन अलकायदा इंडियन सब कांटिनेंट (एक्यूआईएस) और सहयोगी जमात-उल-मुजाहिदीन बंग्लादेश (जेएमबी) के आठ संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से उत्तराखंड के दो हैं। एटीएस ने उत्तराखंड के ज्वालापुर से रुड़की के नगला इमरती निवासी मुदस्सिर और ज्वालापुर के अलीनूर को गिरफ्तार किया है।
मुदस्सिर की गिरफ्तारी के बाद नगला इमरती में घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। पिता अब्दुल रहमान और बड़ा भाई मुजम्मिल ही घर के बाहर नजर आ रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मुदस्सिर के बड़े भाई ने बताया कि वह कुछ माह पूर्व सहारनपुर में रहकर बाइक पर कपड़ों की फेरी करता था।
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संदिग्ध आतंकी मुदस्सिर
- फोटो : अमर उजाला
करीब डेढ़ माह पूर्व वह ज्वालापुर में आकर कपड़ों की फेरी करने लगा। वह सप्ताह में एक या दो बार ही घर पर आता था। मुदस्सिर की गिरफ्तारी की जानकारी उन्हें 29 सितंबर को मिली थी। इसके बाद एटीएस ने उन्हें पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया था। वह लखनऊ गए थे। वहां पर मुदस्सिर के बारे में पूछताछ हुई।
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उत्तराखंड पुलिस
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
पूछताछ के बाद वह वापस घर आ गए थे। वहीं, बातचीत में पिता अब्दुल रहमान ने बताया कि हम तो सीधे साधे लोग हैं। ऐसा कुछ हुआ है अहसास नहीं था कि बेटे पर आतंकी होने के आरोप लगेंगे। अल्ला जाने क्या हुआ है। वह तो सहारनपुर में कपड़े बेचता था। बांग्लादेश से उनके परिवार का दूर-दूर तक कोई ताल्लुक नहीं है।
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- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
संदिग्ध आतंकी मुदस्सिर के घर में बड़ों को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी तो है लेकिन उसके घर में मौजूद तीन बच्चों को इसकी कोई जानकारी नहीं है। सोमवार को मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद रिश्तेदारों को इसकी जानकारी मिली है। इसके बाद रिश्तेदार फोन पर ही परिजनों से जानकारी ले रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
मुदस्सिर के बड़े भाई मुजम्मिल ने बताया कि वह कभी देश से बाहर नहीं गया है। वह कैसे इन लोगों के संपर्क में आया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। वह गांव में भी ज्यादा दिन नहीं ठहरता था। काम के सिलसिले में ज्यादातर सहारनपुर और इसके बाद ज्वालापुर ही रहता था। हां, वह करीब चार-पांच साल पहले मक्का उमरा करने जरूर गया था।