उत्तराखंड के पिथौगराढ़ के बौतड़ी में हुई एंबुलेंस दुर्घटना में काल का ग्रास बने आगर गांव के सैनिक त्रिलोक सिंह बिष्ट (40) वर्तमान में धारचूला में एपीओ में तैनात हैं। नए साल में मकान बनाने के लिए वह छुट्टी लेकर घर आए थे।
आगर ग्राम सभा के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में धर्मशाला का निर्माण किया जा रहा है। सोमवार को इसमें लिंटर डाला जा रहा था। इसी दौरान कमल बहादुर थापा की अंगुली में चोट आ गई। शाम को छह बजे चंद्र सिंह उसे लेकर जिला मुख्यालय स्थित निजी अस्पताल में पहुंचा।
यहां से कमल को रेफर किए जाने के बाद उन्होंने त्रिलोक सिंह को भी अपने साथ हल्द्वानी चलने का अनुरोध किया। गांव का मामला होने के चलते त्रिलोक मना नहीं कर पाया और वह भी उनके साथ चल दिया। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि त्रिलोक सिंह का परिवार पांडेय गांव में रहता है।
एक जनवरी को त्रिलोक धारचूला से अवकाश पर घर आया था। उसने सेरा वार्ड में जमीन खरीदी थी। इस पर वह मकान का कार्य करा रहा था। नए साल में उसके परिवार को उम्मीद थी कि उनका सपनों का घर बन जाएगा तो उसमें आराम से रहेंगे।
लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर है। हादसे में त्रिलोक की मौत के बाद उनकी पत्नी बेसुध हो गई। हादसे में मारे गए चंद्र सिंह के परिवार की आर्थिक स्थित बेहद दयनीय है। चंद्र सिंह की तीन बेटियां और एक बेटा है। मजदूरी कर बड़ी मुश्किल से वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।