भूकंप का पूर्वानुमान लगा पाने की कोई युक्ति न निकलने से अब विज्ञानियों ने इसकी जन्म स्थली को ढूंढना शुरू दिया है। यह माना जा रहा है कि जहां से भूकंप उपजता है, अगर वह जगह पता लग जाए तो इसका पूर्वानुमान लगाने में आसानी हो सकती है।
जानिए, दुनिया बचाने को भूकंप की निशानियों को कहां खोज रहे वैज्ञानिक
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भूगर्भ विज्ञानियों ने जमीन के 660 किमी अंदर भूकंप उपजने की निशानियों का पता लगाना शुरू कर दिया है। भूकंप की जन्म स्थली खोजने की मुहिम में दुनिया भर के विज्ञानी अलग-अलग जुटे हैं। बड़े भूकंप आने की आशंका दुनिया भर के विज्ञानियों को डराए हुए है।
ऐसी स्थिति में विज्ञानियों ने भूगर्भ ‘कोर’ की जांच शुरू कर दी है। खासतौर पर ऐसे स्थानों को चुना गया है, जहां भूगर्भ की एक प्लेट दूसरे के अंदर धंस रही है। इसे सबडक्शन जोन कहा जाता है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों की टीम हिमालयी सबडक्शन जोन में शोध कर रही है। यहां इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिससे हिमालय ऊपर उठता जा रहा है।
विज्ञानियों का मानना है कि भूकंप की उपज का क्षेत्र भूगर्भ में अपर मेंटल और लोअर मेंटल के बीच हो सकता है। तकरीबन 660 किमी नीचे भूगर्भ में इसे मेंटल संक्रमण क्षेत्र कहा जाता है।
भूगर्भ के अंदर भूकंप का सिरा अगर पकड़ में आ जाए तो इसका पूर्वानुमान लगाना आसान हो सकता है। सबडक्शन जोनों में भूगर्भ से निकले मिनरल्स की केमिस्ट्री की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही कार्बन डेटिंग की जा रही है। इस समय में हिमालय के अलावा चीन, नार्वे, कोरिया, जर्मनी आदि देशों के सबडक्शन जोन में विज्ञानी जुट गए हैं।