भगवान गणेश को समर्पित सकट चौथ मंगलवार को मनाई जाएगी। यह तिथि हर वर्ष माघ मास की चतुर्थी को आती है। इस मौके पर माताएं अपनी संतान के लिए उपवास रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से संतान के सभी संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित सुशांतराज
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ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। लेकिन जो चतुर्थी तिथि माघ माह में आती है उसे सकट चौथ कहा जाता है और इसका महत्व बेहद विशेष होता है। इसे तिलकुट चौथ, संकटा चौथ, माघ चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।
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चांद
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इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 8:27 बजे है। चतुर्थी तिथि का शुभारंभ 31 जनवरी को रात 8:24 बजे से होगा। इस तिथि का समापन एक फरवरी को शाम 6:24 बजे होगा। सायंकाल सफेद तिल और बूरा मिलाकर तिलकुट बनाया जाता है। इसी तिलकुट को पकवान के साथ मिष्ठान्न के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका भोग भी गणपति को लगाना शुभ होता है। सकट पर भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा करने से जीवन में आने वाले समस्त प्रकार के कष्टों को दूर करने में मदद मिलती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट के अनुसार सकट चौथ का व्रत जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। इस व्रत को संतान के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन मां अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और गणेश पूजा करती हैं। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें संतान व परिवार की दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।
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ganesha
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संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणपति की आरती जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए। वहीं इस दिन भगवान की पूजा के वक्त ॐ गणेशाय नम: या ॐ गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करना भी काफी शुभ फल देता है।