कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी अपने छोटे से राजनीतिक जीवन में पक्के सियासी ठौर की तलाश ही करते रहे। मगर यह उन्हें नसीब नहीं हो पाया। कांग्रेस, भाजपा से लेकर सपा तक के साथ उनका प्रत्यक्ष और परोक्ष नाता रहा, लेकिन दमदार राजनीतिक पारी खेलने के लिए एक भी ऐसा घर उन्हें नहीं मिल पाया, जो उन्हें आत्मसात करता।
2 of 6
रोहित शेखर तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
अपने जैविक पुत्र को राजनीति में स्थापित करने के लिए एनडी तिवारी ने भी खूब मशक्कत की, लेकिन बात नहीं बन पाई। तिवारी के उत्तराधिकारी बतौर खुद को स्थापित करने के लिए रोहित शेखर तिवारी आने वाले दिनों में और संघर्ष करते, लेकिन असामयिक मौत ने सारी संभावनाओं का पटाक्षेप कर दिया।
3 of 6
रोहित शेखर तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
रोहित शेखर तिवारी कभी कांग्रेस के सदस्य नहीं रहे, लेकिन एनडी तिवारी की वजह से उनका कांग्रेस के साथ एक मजबूत रिश्ता पूरे समय दिखाई दिया। एनडी तिवारी ने उन्हें कांग्रेस के जरिए ही राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश की। कुमाऊं के कई क्षेत्रों में एनडी कई बार रोहित को लेकर घूमे, लोगों से मिलवाया, लेकिन सब कुछ उस दौर में हुआ, जबकि कांग्रेस में एनडी तिवारी मजबूत नहीं रह गए थे।
फिर आया, सपा के साथ रोहित के नए रिश्ते का दौर। एनडी तिवारी के प्रति मुलायम-अखिलेश के बेहद सम्मानजनक व्यवहार का नतीजा रोहित को यूपी सरकार में दायित्वधारी बनाए जाने के रूप में निकला। माना ये ही गया कि सपा से अपने अच्छे रिश्तों के नतीजतन एनडी ने न सिर्फ बेटे रोहित को दायित्व दिलाया, बल्कि कांग्रेस को भी एक संदेश देने की कोशिश की कि उनकी स्वीकार्यता सपा में भी है।
5 of 6
रोहित शेखर
- फोटो : AmarUjala
इन स्थितियों के बीच, एनडी और रोहित ये भी जानते थे कि सपा की साइकिल उत्तराखंड में चलनी मुश्किल है। इसलिए वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले रोहित ने भाजपा की सदस्यता ले ली। जीवनभर कांग्रेसी रहे एनडी तिवारी अपने बेटे को भाजपा की सदस्यता दिलाने के लिए उनके साथ अमित शाह के पास गए। खबरें ये भी उड़ी कि एनडी भी भाजपा में शामिल हो गए हैं, लेकिन सदस्यता सिर्फ रोहित ने ली थी।