उत्तराखंड के चार लाख लोगों की तीन करोड़ रुपये की सब्सिडी पिछले आठ माह से विभाग में अटकी पड़ी है।
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इस वजह से अटकी चार लाख लोगों की तीन करोड़ सब्सिडी, कहीं आपने भी तो नहीं की ये भूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:15 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
इसका कारण है कि अभी तक इन परिवारों ने जिला आपूर्ति कार्यालय में अपने बैंक अकाउंट की जानकारी नहीं दी है, इसी वजह से चार लाख परिवार सब्सिडी के लाभ से वंचित है। वहीं विभाग का कहना है कि जब तक उपभोक्ता अपने बैंक अकांउट की जानकारी नहीं देते तब तक उन्हें सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जाएगा।
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- फोटो : google
दरअसल आपूर्ति विभाग की ओर से प्रति परिवार पांच किलो गेहूं और दस किलो चावल आवंटित किया जाता है। इसमें पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल जहां केंद्र सरकार से मिलता है, वहीं साढ़े सात किलो चावल राज्य सरकार देती है।
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हालांकि, केंद्र की ओर से पूर्व की भांति पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा, जबकि राज्य सरकार अपने हिस्से के साढ़े सात किलो चावल के बदले सब्सिडी के 75 रुपये उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजेगी। इसलिए उपभोक्ताओं की ओर से आपूर्ति विभाग को बैंक खाते की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है।
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वहीं प्रदेश में राज्य खाद्य योजना के तहत 10 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जाता है। लेकिन, इनमें से अब तक मात्र छह लाख परिवारों ने ही आपूर्ति कार्यालय में अपने बैंक खाते की जानकारी दी है। जबकि, अब तक विभाग को चार लाख परिवारों ने खाते की जानकारी नहीं दी है। अब सवाल ये उठता है कि ये चार लाख परिवार पात्रता के दायरे में है या अपात्रता के या फिर ये फर्जी राशन कार्ड हैं। जिनका अभी तक कोई जवाब नहीं आया हैं।
लगातार उपभोक्ताओं से बैंक खाते जमा करने की अपील की जा रही है। सब्सिडी सिर्फ उन उपभोक्ताओं को दी जाएगी, जिन्होने अपने खातों की जानकारी कार्यालयों को भेजी हैं।
- विपिन कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
लगातार उपभोक्ताओं से बैंक खाते जमा करने की अपील की जा रही है। सब्सिडी सिर्फ उन उपभोक्ताओं को दी जाएगी, जिन्होने अपने खातों की जानकारी कार्यालयों को भेजी हैं।
- विपिन कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी