बुधवार को उत्तराखंड में चारों तरफ हड़ताल से हाहाकार मचा रहा। एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा से लेकर सरकारी कार्यालयों में भी काम न होने से आम जनता को फजीहत झेलनी पड़ी। पूरे प्रदेश में प्रबंधन और फील्ड कर्मचारियों के बीच तकरार के कारण बुधवार को प्रदेशभर में 108 एंबुलेंस सेवा और खुशियों की सवारी के पहिये पूरी तरह थमे रहे।
उत्तराखंड में चारों तरफ हड़ताल से मचा 'हाहाकार', जनता ने ऐसे झेली फजीहत, नवजात की मौत
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राजधानी में मंगलवार रात हायर सेंटर के लिए रेफर की गई एक गर्भवती महिला का सड़क पर ही प्रसव हो गया। एंबुलेंस न मिलने के कारण ऑटो से जा रही महिला के नवजात शिशु ने ठिठुरन भरी रात में कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। इस पूरी घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। वहीं, 108 सेवा के प्रदेश प्रभारी मनीष टिंकू का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हमारे पास सभी कॉल का रिकॉर्ड होता है। अगर युवक ने फोन किया है तो उसका रिकॉर्ड हमारे पास होगा। जांच के बाद देखा जाएगा कि आखिर समय पर एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची।
विभिन्न मांगों को लेकर फील्ड कर्मचारी बुधवार को सामूहिक कार्य बहिष्कार पर चले गए। कर्मचारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। दूसरी ओर 108 प्रबंधन ने आंदोलन पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कर्मियों को काम पर लौटने का नोटिस जारी किया है। साथ ही नए सिरे से कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बुधवार को प्रदेशभर में 108 आपातकालीन सेवा की 139 एंबुलेंस और 95 खुशियों की सवारी का संचालन पूरी तरह ठप रहा। 717 फील्ड कर्मियों ने प्रबंधन पर उत्पीड़नात्मक रवैया अपनाने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाते हुए सामूहिक कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारी संगठन के प्रदेश सचिव विपिन जमलोकी ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रबंधन से वार्ता का प्रयास किया लेकिन उनकी एक नहीं सुनी जा रही है।
राजधानी दून में कर्मचारी परेड मैदान में एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की मनमानी का जवाब दिया जाएगा। नए साल का दूसरा दिन प्रदेश कर्मचारी संगठनों के आंदोलनों के नाम रहा। लंबित मांगों पर सरकार के उदासीन रुख से नाराज कर्मचारियों ने अपने-अपने मोर्चों पर बुधवार को धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया। इससे कई सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा, जबकि 108 सेवा न मिलने से रोगियों को तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।