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पितृपक्ष 2018: चार तरह के होते हैं श्राद्ध, तिथि नहीं मालूम तो इस दिन करें पितरों को तर्पण

Wed, 26 Sep 2018 01:10 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 26 Sep 2018 01:10 PM IST
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Pitru paksha 2018 do shradh on amavasya for unknown date
pitru

भारतीय संस्कृति में श्राद्ध पक्ष की बड़ी महत्ता है। शास्त्र का निर्देश है कि माता-पिता आदि के निमित्त नाम और गोत्र का उच्चारण कर श्राद्ध किया जाता है। मृत्यु के बाद पितृ चाहे जिस योनि में चले जाएं, उस जीव को पितृ भाव वहीं प्राप्त हो जाता है। प्राप्ति का प्रकार अलग-अलग होता है। पशु योनी में तृण रूप, सर्प योनि में वायु रूप, यक्ष योनि में पेय रूप, मानव योनि में अन्न रूप और प्रेत योनि में रुधिर रूप श्राद्ध का अंश लेता हैं। 

Pitru paksha 2018 do shradh on amavasya for unknown date
पितृपक्ष - फोटो : SOCIAL MEDIA

शास्त्रों में 12 प्रकार के श्राद्धों का उल्लेख है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार इस समय चार श्राद्ध ही प्रचलित हैं। ये हैं पार्वण, एकोदिष्ट, वृद्धि और सपिंडीकरण। वृद्धि श्राद्ध का अर्थ नांदिमुख श्राद्ध से है। श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त पार्वण श्राद्ध किया जाता है। 

Pitru paksha 2018 do shradh on amavasya for unknown date
pitru

वार्षिक मृत्यु तिथि पर यहीं श्राद्ध होता है। यात्रा के दौरान यात्रा श्राद्ध का वर्णन है। श्राद्ध में पकाए गए खाद्यान्न की शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया गया है। शास्त्र का निर्देश है कि अपने पितृ का श्राद्ध दूसरे के घर में नहीं करना चाहिए। गंगा आदि पवित्र नदियों के तटों पर श्राद्ध का विशेष महत्व है। डा. मिश्रपुरी के अनुसार यदि दूसरे प्रदेश में श्राद्ध किया जाए तो उस प्रदेश के स्वामी पितरों को भी जल देना चाहिए। 

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Pitru paksha 2018 do shradh on amavasya for unknown date
pitru - फोटो : pitru

यद्यपि तीर्थों से भी अधिक पुण्य अपने घर पर किए गए श्राद्ध से मिलता है। यदि मजबूरी में दूसरे के स्थान पर श्राद्ध करना पड़े तो स्थान का किराया चुकाकर श्राद्ध किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को श्राद्ध विमुख नहीं होना चाहिए। 

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Pitru paksha 2018 do shradh on amavasya for unknown date
pitru

अपनी तिथि पर अपना हव्य लेने के लिए पितृगण पुत्र के द्वार पर आते हैं। उस दिन पुत्र यदि उनका पितृ का श्राद्ध न करे तो अमंलग दोष लगता है। जिन पितरों की तिथि याद न हो उनका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए। 

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