पिछले वर्ष देवों के जगने के बाद प्रारंभ हुआ मांगलिक पर्वों का सीजन अब कुछ ही दिनों तक चलेगा। विवाहों का सिलसिला भी तीन जुलाई को पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
संयोग यह है कि मांगलिक कार्यों तथा विवाहों को अंजाम देने वाले गुरु और शुक्र अभी लंबे समय तक जगे रहेंगे। अलबत्ता सभी देवों के देव विष्णु का शयन 4 जुलाई को हरिशयनी एकादशी के दिन हो जाएगा।
जनजीवन से मांगलिक कार्यों और विवाहों का गहरा रिश्ता है। शेष रह गए मई के महीने में केवल पांच मुहूर्त विद्यमान है। जून के महीने में दस शद्ध मुहूर्त पड़ेंगे। जुलाई में एक और तीन जुलाई को ही विवाह के मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार विवाह तभी सफल होते है जब शद्ध मुहूर्तों में किया जाए।
शुद्घ मुहूर्तों में ही पूर्ण योग मौजूद रहते हैं। शास्त्रीय दृष्टि से अर्द्ध एवं आंचलीय योगों में विवाह नहीं करने चाहिए। गलत मुहूर्तों में विवाह के कारण रिश्ते जल्दी टूट जाते है अथवा बिगड़ जाते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से विवाहों के मुहूर्त तथा अन्य मांगलिक कार्य परस्पर जुड़े हुए है। सूर्य के उत्तरायण होते हुए अनेक प्रकार के मांगलिक कार्य चलते रहते हैं।
कुछ ही समय बाद कर्क राशि में आने के बाद सूर्य नारायण दक्षिणायन हो जाएंगे। तब वैसे भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चार जुलाई को हरि शयन पर जा रहे हैं अत: चार महीने के लिए विवाहों का सीजन पूरी तरह बंद हो जाएगा।