साल की सबसे लंबी रात 21 दिसंबर की होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 800 साल बाद 2021 में पांच अप्रैल(सोमवार) को शनि और गुरु की ऐसी ही युति बन रही है। कुंभ की पूर्व बेला में इस युति का धरती पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
ग्रहों के राजा गुरु और शनि दोनों ही बहुत बड़े ग्रह हैं। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक इनके परिवर्तन से व्यापक असर पड़ता है। आपस में इनका संबंध परिवर्तन लेकर आता है। 24 जनवरी 2020 से शनि मकर राशि में भ्रमण कर रहे हैं। 18 जनवरी 2023 को कुंभ राशि में आएंगे। गुरु अभी 20 नवंबर से मकर राशि में है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी
भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि गुरु और शनि की युति पांच अप्रैल 2021 तक मकर राशि में रहेगी। मतलब ये दोनों ग्रह पांच अप्रैल तक साथ रहेंगे।
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डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि 21 दिसंबर को दोनों की अंशात्मक युति होगी। दोनों एक ही अंश पर होंगे। शनि और गुरु दोनों ही छह अंश पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पर होंगे। ये नक्षत्र सूर्य का है जो गुरु का मित्र व शनि का शत्रु है।
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इसलिए इस अंशात्मक युति के मिले-जुले परिणाम आएंगे। ये हिंदुस्तान के लिए बहुत अच्छा समय होगा। इस दिन से प्रारंभ की हुई कोई भी दवा उपयोगी सिद्ध होगी। इस दिन कोई भी रुपया पैसा जमा करेंगे तो वो वृद्धि करेगा। उसका उपयोग अच्छे कार्यों में ही होगा। इस दिन खरीदा गया सोना, चांदी, पुखराज, माणिक, नीलम, शुभ फलदाई होगा।