फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

गंगा नदी के धरती पर आने के पीछे छिपा ये रहस्य नहीं जानते होंगे आप

Tue, 02 May 2017 05:50 PM IST
कौशल सिखौला / अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 02 May 2017 05:50 PM IST
विज्ञापन
mystery behind river ganga
गंगा - फोटो : अमर उजाला

त्रेता युग में साठ हजार सगर पुत्रों की राख न बहानी होती तो इस धरती पर गंगा भी न आती। ऐसा होता तो न तो समूची मानव जाति पापों से तर पाती और न आर्यावर्त के उत्थान का गवाह कोई बनता। विशुद्ध रूप से अस्थियों को बहाने के लिए ब्रह्मलोक और स्वर्गलोक छोडक़र धरती पर बहती गंगा को करीब दस लाख वर्ष बीत चुके हैं।


      

mystery behind river ganga
गंगा स्नान

भगवान राम के पुरखे थे राजा सगर। वस्तुत: ब्रह्मा से सूर्यवंश का जन्म हुआ। मनु पहले सूर्यवंशी थे। मनु के पुत्र इक्षवाकु हुए, जिनके पौत्र राजा सगर थे। सगर की दो पत्नियां केशनी और सुमती थी। तप से सुमती को साठ हजार पुत्र हुए, जबकि केशनी को असमंजस नाम के एक पुत्र हुए।
 

mystery behind river ganga
फीका रहा बैशाखी स्नान - फोटो : अमर उजाला
राजा सगर ने जब सौ अश्वमेघ यज्ञ करने का घोड़ा छोड़ा तो इंद्रलोक छिन जाने के डर से इंद्र ने घोड़े को पकडक़र कपिलमुनि के आश्रम में बांध दिया। घोड़ा रोके जाने की खबर मिलते ही साठ हजार सगर पुत्रों ने कपिलमुनि के आश्रम का विध्वंस करना शुरू कर दिया। तब ध्यान से जगे कपिलमुनि के श्राप से समस्त सगर पुत्रों की जलकर मृत्यु हो गई।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
mystery behind river ganga
गंगा सप्तमी पर्व - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

आकाशवाणी हुई कि इनकी मुक्ति तभी हो सकती है जब स्वर्ग से गंगा धरती पर आ जाए। उनकी राख बहाने का बीड़ा उनके सौतेले भाई असमंजस ने उठाया। उनके पुत्र अंशुमान हुए जिनके पुत्र राजा दिलीप थे। वे सभी गंगा लाने में समर्थ नहीं हुए। सगर के प्रपौत्र भगीरथ लंबी तपस्या के बाद गंगा को ब्रह्मलोक से स्वर्गलोक और स्वर्गलोक से शिव की जटाओं में लाने में सफल हुए। वहीं गंगा बहते हुए वर्तमान गंगा सागर के कपिलमुनि आश्रम पहुंची और सगर पुत्रों की राख बहाई। सगर और भगीरथ दोनों ही भगवान राम के पुरखे थे।
      

विज्ञापन
mystery behind river ganga
गंगा

गंगा का जन्म वास्तव में ब्रह्मलोक में राधा-कृष्ण के महारास से वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन हुआ था। मंगलवार को मां का जन्मोत्सव समूचे गांगेय क्षेत्र में गंगा सागर तक मनाया जाएगा। इसी दिन गंगा शिव की जटाओं में समाई थी और वहां से समुद्र मिलन के लिए भगीरथ के पीछे-पीछे कपिलमुनि के आश्रम के लिए चली थी।
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed