राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मणिकर्णिका और उरी फिल्म को लेकर अपनी राय सबके सामने रखी। वे देहरादून में एक परिवार सम्मेलन में आए अभिभावकों और उनके बच्चों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे मणिकर्णिका और उरी जैसी फिल्में देखें और अपने बच्चों को दिखाएं। उन्होंने कहा कि परिवार का मतलब सिर्फ व्यक्तियों का परिवार नहीं होता बल्कि अपना समाज और अपना देश भी हमारा परिवार है। जब हम इसे एक परिवार के रूप में देखेंगे, राष्ट्र सुखी और सुरक्षित रहेगा।
हरिद्वार बाइपास स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में आयोजित संघ के इस परिवार सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों के साथ पहुंचे थे। संघ प्रमुख के पहुंचने पर उपस्थित लोगों ने उनका भारत माता की जय के नारों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम में पहुंचने के बाद संघ प्रमुख ने घर के एक बुजुर्ग की तरह उपस्थित अभिभावकों को परिवार का महत्व समझाने की कोशिश की।
संघ के मूल एजेंडे से जुड़े मुद्दों के उन्होंने एक किनारे रखते हुए कोई राजनीतिक बात नहीं की। उनका पूरा जोर परिवारों के संस्कार, संस्कृति, भाषा, रहन-सहन और देश के प्रति दायित्वों का निर्वहन था। उन्होंने कहा कि ये प्रश्न उठना लाजिमी है कि संघ परिवारों को क्यों महत्व दे रहा है? ये पूरा समाज और देश एक परिवार है और हम नागरिक इसके सदस्य हैं।
उन्होंने भाषा और संस्कार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर परिवार को अपनी भाषा को अपनाना चाहिए। करीब 50 मिनट के अपने भाषण में उनका मुख्य उद्देश्य यही था कि कोई भी परिवार अपने सामाजिक उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकता।