देहरादून निवासी मेजर चित्रेश सिंह कश्मीर के राजौरी में आईईडी धमाके में शहीद हो गए। मां बेटे के सिर सेहरा सजाने की तैयारी कर रही थी, लेकिन शहादत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। पिता का तो बस बेटे से आखिरी बात हुई बातें याद कर रो-रोकर बुरा हाल है।
मेजर चित्रेश मऊ में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद हाल ही में घर आया था। दो फरवरी को चित्रेश देहरादून से ड्यूटी पर गया था। पिता एसएस बिष्ट उसी दिन को याद कर रोए जा रहे हैं। उन्होंने चित्रेश से कहा था कि वह अब तो शादी के लिए छुट्टी ले ले, लेकिन वो पोस्टिंग पर राजौरी चला गया। मेजर चित्रेश का जवाब था कि 28 फरवरी को वह वापस आकर शादी की बाकी तैयारियां पूरी कर लेगा।
एसएस बिष्ट का शुक्रवार को जन्मदिन था। बेटे चित्रेश ने उन्हें फोन कर बधाई दी थी। इस दौरान उन्होंने अपनी मां से भी काफी देर बात की। मां ने भी छुट्टी लेकर जल्द से जल्द घर आने को कहा था, लेकिन मां को उन्होंने चिंता न करने की बात कहते कुछ दिन में पहुंचने का आश्वासन दिया था। बिष्ट का कहना था कि रोजमर्रा ही बेटे से बात हो जाती थी।
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शहीद चित्रेश बिष्ट (फाइल फोटो)
चित्रेश की शादी की लगभग सारी तैयारियां हो चुकी थीं। जीएमएस रोड स्थित एक होटल की बुकिंग के अलावा तमाम खरीददारी भी हो चुकी थी। बिष्ट शनिवार को ही अपनी रिश्तेदारी में कार्ड बांटने गए थे। मेजर चित्रेश के शहादत की खबर से खुशियां मातम में तब्दील हो गई। चित्रेश को याद कर अब मां और पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
परिवार के मुताबिक चित्रेश बचपन से ही काफी होनहार थे। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल से की थी और फिर एनडीए की परीक्षा पास कर सेना की राह चुनी। मेजर रैंक के लिए हुई विभागीय परीक्षा में उनका ऑल इंडिया में नौंवा स्थान था। मऊ में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने 25 बम डिफ्यूज कर उत्तम अधिकारियों में नाम शामिल किया था।