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तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शहीद का शव, पिता को एकटक देखता रहा मासूम बेटा, अंत्येष्टि में रोया पूरा गांव, तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 07 Apr 2020 06:38 PM IST
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उत्तराखंड के लाल शहीद हवलदार देवेंद्र सिंह राणा का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटे ताबुत के साथ जैसे ही गांव पहुंचा हर कोई रो पड़ा। बुजुर्ग पिता बेटे के शव को देखकर बेहोश हो गए। वहीं, शहीद का 11 साल का बेटा आयुष यह सब एकटक देखता रहा।
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मंगलवार को हेलीकॉप्टर से शहीद का पार्थिव शरीर चारधाम हेलीपैड पहुंचा। यहां पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सीएम व गढ़वाल सांसद ने शहीद के पार्थिव शरीर को कांधा लगाया और सेना के वाहन तक पहुंचाया। जहां से सांकरी, गुप्तकाशी, ल्वारा, लमगोंडी, सोणितपुर, फली फसालत, नागजगई होते हुए शहीद का पार्थिक शरीर अपने पैतृक गांव तिनसोली पहुंचा। तिरंगे में लिपटे शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही घर के चौक पर पहुंचा, पूरा गांव बिलख-बिलख कर रो पड़ा।
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39 वर्षीय बेटे को ताबुत में लेटा देख पिता भूपाल सिंह बेहोश हो गए। जैसे-तैसे छोटे बेटे रवींद्र ने पिता को सहारा दिया। वहीं, शहीद की पत्नी विनीता देवी और माता कुंवरी देवी रो-रोकर बार-बार बेहोश होती रहीं। उन्हें परिजनों द्वारा होश में लाने की कोशिशें की गई। लेकिन दोनों के शरीर मानों जड़मान हो चुके थे। इस सबके बीच, शहीद की 14 वर्षीय बेटी आंचल इस पूरे घटनाक्रम से वाकिफ थी। सुबकते हुए वह यह सब देख रही थी।
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लेकिन उसके 11 वर्षीय भाई आयुष को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह ताबुत को एकटक देखते हुए कभी अपने रोते हुए दादा तो कभी बेसुध मां और दादी के चेहरे को निहारते रहा। यह दृश्य देख वहां मौजूद ग्रामीण व सेना के जवानों की आंखें भी नम हो गई। लगभग 12 मिनट तक पैतृक घर में रखने के बाद शहीद के पार्थिव शरीर को पैतृक घाट के लिए विदा किया गया। इस दौरान पूरा गांव देवेंद्र सिंह राणा अमर रहे, जब तक सूरज-चांद रहेगा, देवेंद्र तेरा नाम रहेगा, के नारों से गूंजता रहा। लगभग ढाई बजे पार्थिव शरीर भीरी स्थिति पैतृक घाट पर लाया गया।
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शहीद देवेंद्र राणा की अपने परिवार के साथ आखिरी बातचीत शनिवार को हुई। छोटे भाई रवींद्र ने अपनी भाभी का हवाला देते हुए बताया कि भाई ने मुठभेड़ में जाने से लगभग एक घंटा पहले बातचीत कर कहा था कि वह जरूरी काम से जा रहे हैं। लौटकर फिर बात करेंगे। लेकिन, सोमवार सुबह उनके शहीद होने की खबर आई।
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