मां भगवती का असीमित 'शक्तिपुंज' देवभूमि उत्तराखंड में ऊंचाई पर मौजूद है। कालीमठ मंदिर रुद्रप्रयाग में स्थित है। यहां से करीब आठ किमी. खड़ी चढ़ाई के बाद कालीशिला के दर्शन होते हैं। विश्वास है कि मां दुर्गा शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज का संहार करने के लिए कालीशिला में 12 वर्ष की कन्या के रूप में प्रकट हुई थीं। कालीशिला में देवी-देवताओं के 64 यंत्र हैं।
उत्तराखंड में मौजूद है मां काली का 'शक्तिपुंज', तस्वीरों में करिए दर्शन...
2 of 8
maa kali shaktipunj kalishila and kalimath
मान्यता है कि इस स्थान पर शुंभ-निशुंभ दैत्यों से परेशान देवी-देवताओं ने मां भगवती की तपस्या की थी। तब मां प्रकट हुई। असुरों के आतंक के बारे में सुनकर मां का शरीर क्रोध से काला पड़ गया और उन्होंने विकराल रूप धारण कर लिया। मां ने युद्ध में दोनों दैत्यों का संहार कर दिया। मां को इन्हीं ६४ यंत्रों से शक्ति मिली थी।
उत्तराखंड में मौजूद है मां काली का 'शक्तिपुंज', तस्वीरों में करिए दर्शन...
3 of 8
maa kali shaktipunj kalishila and kalimath
स्थानीय निवासीओं के अनुसार, यह भी किवदंती है कि माता सती ने पार्वती के रूप में दूसरा जन्म इसी शिलाखंड में लिया था। वहीं, कालीमठ मंदिर के समीप मां ने रक्तबीज का वध किया था। उसका रक्त जमीन पर न पड़े, इसलिए महाकाली ने मुंह फैलाकर उसके रक्त को चाटना शुरू किया। रक्तबीज शिला नदी किनारे आज भी स्थित है। इस शिला पर माता ने उसका सिर रखा था।
उत्तराखंड में मौजूद है मां काली का 'शक्तिपुंज', तस्वीरों में करिए दर्शन...
4 of 8
maa kali shaktipunj kalishila and kalimath
कालीमठ मंदिर में एक कुंड है, जो रजत पट/ श्रीयंत्र से ढका रहता है। शारदीय नवरात्रों में अष्टमी को इस कुंड को खोला जाता है। मान्यता है कि जब महाकाली शांत नहीं हुईं, तो भगवान शिव मां के चरणों के नीचे लेट गए। जैसे ही महाकाली ने शिव के सीने में पैर रखा वह शांत होकर इसी कुंड में अंतर्ध्यान हो गईं। माना जाता है कि महाकाली इसी कुंड में समाई हुई हैं। कालीमठ में शिव-शक्ति स्थापित हैं। यहां पर महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, गौरी मंदिर और भैरव मंदिर स्थित हैं। यहां अखंड ज्योति निरंतर जल रही है।
उत्तराखंड में मौजूद है मां काली का 'शक्तिपुंज', तस्वीरों में करिए दर्शन...
5 of 8
maa kali shaktipunj kalishila and kalimath
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित यह कालीमठ मंदिर मां काली को समर्पित है। इसे भारत के सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। कालीमठ रुद्रप्रयाग जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। स्कंद पुराण के अंतर्गत केदारखंड के बासठवें अध्याय में मां के इस मंदिर का वर्णन है। रुद्रशूल नामक राजा की ओर से यहां शिलालेख स्थापित किए गए हैं जो बाह्मी लिपि में लिखे गए हैं। इन शिलालेखों में भी इस मंदिर का पूरा वर्णन है।