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भगवान शिव को यहां शरण नहीं मिलती तो हो जाते भस्म
Tue, 07 Jun 2016 09:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 07 Jun 2016 09:11 PM IST
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koteshwar mahadev temple
- फोटो : file photo
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रुद्रप्रयाग से लगभग तीन किमी. आगे अलकनंदा के तट पर बना प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में आलौकिक है। कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।
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lord shiva koteshwar mahadev temple rudraprayag
इस गुफा वाले मंदिर के आसपास शांतिमय और सम्मोहित कर देने वाला माहौल है।
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मान्यता है कि कौरवों की मृत्यु के बाद जब पांडव मुक्ति का वरदान मांगने के लिए भगवान शिव को खोज रहे थे तो शिव इसी इसी गुफा मे ध्यानावस्था में रहे थे।
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एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार भस्मासुर नामक राक्षस ने तपस्या कर शिव से किसी भी व्यक्ति के सिर पर हाथ रखने पर भस्म करने का वरदान मांगा लिया था।
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वरदान पाने के बाद राक्षस ने भगवान शिव को भस्म करने की सोची। भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।
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