चुनाव 2019: जब दूसरे दल के कार्यकर्ताओं को देखकर आश्चर्य में पड़े गए थे नेहरू
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राजनीतिक दलों के नुमाइंदों के लिए अब चुनावी सभाएं शक्ति प्रदर्शन तक सीमित होकर रह गई हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर चुनाव प्रचार के लिए पहुंची बड़ी राजनीतिक हस्तियों के विचारों को सुनने के लिए उमड़ पड़ते थे।
ऐसी एक चुनावी सभा में कांग्रेसियों से ज्यादा सोशलिस्ट पार्टी की लाल टोपी पहने लोग अधिक नजर आने पर पं. नेहरू भी आश्चर्य में पड़ गए थे। 1952 के विधानसभा चुनाव में रानीखेत पूर्वी क्षेत्र में सोशलिस्ट पार्टी से पूर्व मंत्री गोविंद सिंह माहरा और कांग्रेस से हरगोविंद पंत, रानीखेत दक्षिणी से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मदन मोहन उपाध्याय और कांग्रेस से हरिदत्त कांडपाल मैदान में थे।
कनस्तर काटकर बनाए जाते थे बैलेट बॉक्स
पंडित नेहरू दिल्ली से कार से रानीखेत पहुंचे, यहां से भिकियासैंण गए। वहां उनकी चुनावी सभा हुई, लेकिन सभा में जुटी भीड़ में कांग्रेस की सफेद टोपी धारण करने वाले कम सोशलिस्ट पार्टी की लाल टोपी पहने लोग अधिक थे। उस चुनाव में माहरा 80 वोटों से हार गए और मदन मोहन उपाध्याय पांच वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे।
तकनीक के इस दौर में चुनाव के लिए ईवीएम से लेकर वीवीपैट जैसी कंप्यूटराइज मशीनों का इस्तेमाल होने लगा है, लेकिन 1952 के दौर में चुनाव सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न होते थे। प्रत्येक बूथों में कनस्तर काटकर बैलेट बॉक्स रखे जाते थे, बॉक्सों के बाहर दलों का चुनाव चिह्न चस्पा होता था। चुनाव सामग्री का अभाव था, तो लोग अपने-अपने दलों की रंगीन टोपियां धारण करते थे।