कहते हैं जब अपनों का साथ हो तो मुश्किल समय भी बड़ी आसानी से हंसते-खेलते गुजर जाता है। दिल्ली में धरना दे रहे उत्तराखंड के किसानों का कहना है कि अब उन्हें न ठंड सता रही है और अपने घर को छोड़ने का गम। अब यहां लाखों किसान एक परिवार जैसा हो गया है। यहां अब हर तरफ उत्सव जैसा माहौल है। सड़क उनका बिस्तर बन गया है और आसमान बिछोना। धरने पर बैठे किसानों की मानें तो अब उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर डटे रहने की इतनी व्यवस्था कर ली है कि कड़ाके की ठंड का सीजन तो दूर साल भर भी रहना पड़े तो कोई गम नहीं है।
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दिल्ली बॉर्डर पर उत्तराखंड के किसानों ने लगाए तंबू
- फोटो : अमर उजाला
आज से 36 दिन पहले दिल्ली में पुलिस से झड़प, संघर्ष और आपसी टकराव के साथ शुरू हुआ किसानों का संघर्ष अब उत्सव में बदलता जा रहा है। दिल्ली गेट को हजारों किसानों ने अपना घर बना लिया है। इसमें उत्तराखंड से पहुंचे करीब चार हजार किसान भी भागीदारी निभा रहे हैं। इनमें हरिद्वार से दिल्ली गेट पर पहुंचे किसानों की संख्या भी एक हजार के आसपास है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के हरिद्वार जिलाध्यक्ष विकेश शास्त्री ने बातचीत में बताया कि ऊधमसिंह नगर जिले से करीब सौ ट्रैक्टरों में किसानों ने दिल्ली गेट पर डेरा डाला हुआ है। जबकि हरिद्वार जिले से 30 से अधिक ट्रैक्टर ट्रालियां पहुंची है। जबकि इतनी ही संख्या में गाड़ियां पहुंची हैं।
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दिल्ली बॉर्डर पर उत्तराखंड के किसान
- फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार जिले से ज्यादातर किसान नारसन, पथरी और लक्सर क्षेत्रों के हैं। किसानों ने अपने-अपने हिसाब से सड़कों पर रहने का इंतजाम कर लिया है। किसी ने तंबू बना रखे हैं तो कई किसानों ने टेंट बनाए हैं। वहीं कई किसानों ने ट्राली पर तिरपाल डालकर उसमें बिस्तर लगा लिए हैं। इसके अलावा कई लोगों ने टेंट में पुराली बिछाकर उस पर बिस्तर लगा दिए हैं। ठंड से बचने के लिए बिस्तरों की कोई कमी नहीं है।
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दिल्ली बॉर्डर पर खाना बनाते उत्तराखंड के किसान
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली कूच करते समय यहां के किसान अपने साथ कई दिन तक खाने पीने का राशन और रहने के लिए सभी सुख सुविधाओं का सामान लेकर गए हैं। रोटी बनाने के लिए भी मशीनें रख दी गई हैं। दिल्ली में डेरा डाले उत्तराखंड के किसानों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वहां संघर्ष और कड़ाके की ठंड में कड़ी परीक्षा के बीच भी उत्सव जैसे नजारे का अहसास हुआ।
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दिल्ली बॉर्डर पर खाना बनाते उत्तराखंड के किसान
- फोटो : अमर उजाला
किसानों की ओर से लगाए गए टेंट में रोजाना करीब एक हजार लोगों का लंगर बनाया जा रहा है। किसान नेता अपने साथ हलवाई भी लेकर पहुंचे हैं, जो हर दिन अलग-अलग प्रकार का खाना बना रहे हैं। यही नहीं खाने के साथ रसगुल्ले और जलेबी आदि मिठाइयां भी बनाई जा रही हैं।