रुद्रप्रयाग में 12 सालों में हेली सेवा के दौरान करीब सात हादसे हो चुके हैं। साल 2013 में भी केदारनाथ आपदा के बाद राहत व बचाव कार्य में लगा सेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर जंगलचट्टी की पहाड़ी पर टकराने से क्रैश हो गया था।
केदारनाथ: पायलट की जिद ले गई छह यात्रियों की जान, पहाड़ी से टकराते ही दो हिस्सों में बंटा हेलीकॉप्टर और लगी आग
इस हादसे में सेना के 20 अधिकारी और जवान शहीद हो गए थे। तब कई दिनों की खोज के बाद शव मिल पाए थे। उस वक्त भी दुर्घटना का कारण अचानक पहाड़ी क्षेत्र में छाया घना कोहरा बताया गया था। वहीं, आज फिर घना कोहरा सात लोगों की जान लील गया।
Kedarnath: एक दशक में हेलीकॉप्टर क्रैश की दूसरी बड़ी दुर्घटना, हादसा देख याद आया 2013 का मंजर, तस्वीरें
11750 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ तीन तरफा पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सिर्फ केदारघाटी वाला क्षेत्र है, जो वी आकार का है और यही केदारनाथ पहुंचने का एकमात्र रास्ता भी है। मंदाकिनी नदी का स्पान काफी कम होने के कारण दोनों तरफ ऊंची पहाड़ियां हैं, जिससे घाटी बहुत ही संकरी है। साथ ही यहां मौसम का मिजाज कब खराब हो जाए, कहना मुश्किल है।
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केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ यात्रा पैदल यात्रा को सुरक्षित व सुलभ बनाने के दावों के बीच प्रदेश सरकारों का ध्यान हेलीकॉप्टर सेवा पर अधिक रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2014 में जहां केदारनाथ यात्रा में सिर्फ 6 हेली कंपनियों ने अपनी सेवा दी थी।
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केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, यह संख्या 2016 व 2017 में 13 तक जा पहुंची। लेकिन 2018 व 2019 में हेली कंपनियों की संख्या कम रही। वर्तमान में भी नौ हेली कंपनियां केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन कर रही हैं।
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केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, अब हादसे के बाद कांग्रेस ने सरकार से जांच की मांग के साथ दोषियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि खराब मौसम में हेलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत क्यों दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए। जिम्मेदार के खिलाफ सात लोगों की हत्या का मुकद्दमा दर्ज करते हुए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश
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धस्माना ने कहा कि पैसा कमाने की आपाधापी में हेली कंपनियां नियमों की धज्जियां उड़ाकर यात्रियों की जान जोखिम में डालती हैं, जिसका दुष्परिणाम मंगलवार को देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से उत्तराखंड की तीर्थाटन और पर्यटन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।