पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने दिनभर व्रत रखने के बाद रात को चांद का दीदार कर अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। उत्तराखंड में सुहागिनों ने दिन भर के निर्जला व्रत रखा और दोपहर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। शाम को सोलह श्रंगार कर उन्होंने चांद निकलने का इंतजार किया। रात 8.11 बजे चांद निकलने के बाद रस्म के अनुसार चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य दिया और व्रत का उद्यापन किया।
इसके बाद पति की आरती कर व्रत खोला और पतियों ने आकर्षक उपहार भी दिए। इससे पहले दिनभर घरों और मंदिरों में करवा चौथ को लेकर विशेष आयोजन हुए। कई जगह घरों में सुहागिनों ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कथा सुनी।
लेकिन शाम को मौसम खराब होने के कारण कई जगहों पर चांद नहीं दिखाई दिया। ऐसे में सुहागिनों ने चांद की दिशा को देखकर भी व्रत खोला। वहीं, कई जगहों पर लोगों ने ऑनलाइन दूसरे शहरों में निकले चांद को देखकर व्रत खोला।
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उत्तराखंड में करवा चौथ
- फोटो : अमर उजाला
करवाचौथ पर रविवार सुबह सरगी खाकर सुहागिनों ने व्रत की शुरुआत की। इसके बाद सोलह शृंगार कर पीतल, तांबे और मिट्टी के करवों में चूड़ा, गट्टा, मिठाई, पूड़ी आदि सामग्री रख कर पूजा की। इस दौरान सुहागिनों ने करवाचौथ की कथा सुनी।
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उत्तराखंड में करवा चौथ
- फोटो : अमर उजाला
पति की लंबी आयु के लिए पत्नी की तरफ से रखा जाने वाला करवाचौथ का व्रत सबसे अहम व्रत माना गया है। अखंड सौभाग्यवती की कामना का यह व्रत निर्जला रखा जाता है। सूर्योदय से पहले तारों की छांव में सुहागिनों ने सरगी खाकर व्रत की शुरूआत की।
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उत्तराखंड में करवा चौथ
- फोटो : अमर उजाला
स्नान ध्यान कर महिलाओं ने दीवार पर गेरू और पिसे चावलों के घोल से करवा माता का चित्र बनाया। कुछ सुहागिनों ने बाजार में मिलने वाले करवा चौथ का चित्र का कलेंडर पूजा स्थान पर लगाया। आठ पूड़िया पूजन के लिए बनाई। मां गौरी और गणेश जी बनाएं। दिन भर निर्जला व्रत रख विधि-विधान से पूजा अर्चना की।
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दूसरे शहर में निकले चांद को ऑनलाइन देखकर खोला व्रत
- फोटो : अमर उजाला
चंद्र दर्शन के बाद सुहागिनों ने सास-ससुर को बायना के रूप में भोजन, वस्त्र व दक्षिणा भी दी। सास ससुर ने भी सदा जोड़ी बने रहने का आशीर्वाद देते हुए अपनी बहुओं को उपहार भी भेंट किए।