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एक सिक्के ने बचाई थी इस वीर की जान, कारगिल वॉर की ये दास्तां सुन रोंगटे खड़े हो जाएंगे

Thu, 26 Jul 2018 11:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Jul 2018 11:34 AM IST
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Kargil war most shocking story
कारगिल युद्ध

26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है। आज हम आपको कारगिल वॉर के उस जांबाज से मिला रहे हैं जिसकी कहानी आपक रोंगटे खड़े कर देगी।

Kargil war most shocking story
kargil yogendra
कारगिल वॉर के हीरो योगेंद्र सिंह यादव की जान एक सिक्के ने बचाई। उन्होंने दुश्मनों से लड़ते हुए कारगिल युद्घ में विजय के बाद हिल टॉप पर तिरंगा फहराया। वक्त गुजरने के साथ यादें धुंधली हो जाती हैं। कारगिल विजय को पूरे 19 साल हो गए। कारगिल की यादें उनके जहन में आज भी जिंदा हैं। वहीं यादें उनका हौसला बढ़ाती हैं और हर मोर्चे पर ताकत देती हैं। वह कहते हैं 20 मई 1999 का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। तब मेरी उम्र मात्र 19 साल और नौकरी ढाई साल की थी। पांच मई को मेरी शादी थी।

 
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योगेंद्र सिंह यादव - फोटो : amar ujala

छुट्टियां लेकर घर आया था। 20 मई को हैड क्वार्टर से बुलावा आ गया। मेरी बटालियन को दराज सेक्टर के तोलोलिंग पहाड़ी फतह करने का टास्क मिला। तोलोलिंग पहाड़ी पाकिस्तानी फौज के कब्जे में थी। मेरी पलटन के जांबाज फौजियों ने 22 दिन की लंबी लड़ाई के बाद तोलोलिंग पहाड़ी पर कारगिल युद्ध की पहली विजय के साथ तिरंगा फहरा दिया। तोलोलिंग के बाद पलटन का अगला टास्क टाइगर हिल टॉप था। टाइगर हिल टॉप पूरी तरह पाकिस्तानी फौज के कब्जे में था। वहां पहुंचना आसान नहीं था। जुनून और जज्बे के साथ मेरी पलटन ने दुश्मनों की तरफ कदम बढ़ाते हुए चढ़ाई शुरू कर दी। पाकिस्तानी फौज पहाड़ी की चोटी पर थी। उसके लिए टारगेट बहुत आसान था।

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परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव - फोटो : amar ujala

मैने और मेरी पलटन के जवानों ने रास्ता साफ  करने के लिए पांच पाकिस्तानी जवानों को ढेर कर दिया। पाकिस्तानी फौज ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर हिंदुस्तानी फौज का रास्ता रोक दिया। पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी से बचते हुए मैं अपने सात जांबाज जवानों के साथ टाइगर हिल टॉप पहुंचा। दोनों तरफ  से गोलीबारी हुई। हमारे पास बारूद कम था। तब कुछ समझ नहीं आ रहा था।जुनून सिर्फ  टाइगर हिल टॉप पर तिरंगा फहराने का था। पाकिस्तानी फौज की आंखों में धूल झोंकने के लिए हमने प्लान के तहत गोलीबारी बंद कर दी। इससे पाक फौज गलतफहमी का शिकार हो गई।
 

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yogendra singh yadav

उन्हें लगा कि गोलीबारी में हिंदुस्तानी फौजी मर गए। रणनीति के तहत अचानक पाकिस्तानी फौज पर हमला बोल दिया और कई पाकिस्तानी मारे गए। कुछ पाकिस्तानी फौजी भाग निकले और हमने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर लिया। जीत का जश्न मना पाते 35 मिनट के बाद पाक की तरफ  से दोबारा हमला हो गया। पाक फौजियों की संख्या काफी अधिक थी। आमने-सामने की लड़ाई में मेरे सभी साथी मारे गए। मैं भी बुरी तरह जख्मी हो गया। हाथों और पैरों में कई गोलियां लगी थी। लहूलुहान जमीन पर गिरा था। पाक फौजियों ने शहीद हिंदुस्तानी फौजियों के साथ क्रूरता की। 

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