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कांवड़ 2018: इन नियमों के पालन से खुश होते हैं भगवान शिव, गलती करने पर देते हैं सजा

Wed, 01 Aug 2018 09:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लक्सर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लक्सर Updated Wed, 01 Aug 2018 09:53 AM IST
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kanwar yatra 2018 devotee should obey these rules
kanwar yatra - फोटो : amar ujala

कांवड़ यात्रा के लिए एक कांवड़िए को सख्त नियमों को पालन करना होता है। परिजन भी उस दिन से ही नियम में बंध जाते हैं, जिस दिन से घर से कोई यात्रा पर निकलता है। दोनों में से किसी ने नियम का उल्लंघन किया तो बताया जाता है कि दूसरे को बेहद तकलीफ उठानी पड़ती है।


 

kanwar yatra 2018 devotee should obey these rules
kanwar - फोटो : अमर उजाला

परंपरा, मान्यता और नियम के तहत की गई यात्रा करने पर ही किसी परिवार को जन्मों-जन्मांतरण का पुण्य प्राप्त होता है।  जब कोई शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर घर से निकलता है तो वह अपनी बहन से टीका लगाकर निकलता है। लौटने पर बहन भाई की आरती उतारती है।


 
kanwar yatra 2018 devotee should obey these rules
kanwar yatra

मान्यता यह भी है कि जब तक कांवड़िया घर नहीं पहुंचता उसके घर में छौंक नहीं लगता। कहते हैं घर में छौंक लगाने से यात्रा पर निकले कांवड़िए के पैरों में छाले पड़ जाते हैं। जब तक कांवड़िया घर नहीं पहुंच जाता तब तक घर में शिव और माता गंगा के भजन-कीर्तन गाए जाते हैं।


 
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kanwar yatra 2018 devotee should obey these rules
kanwar yatra photos from uttarakhand

रात में भजन-कीर्तन सुनने वालों को प्रसाद के रूप में खील बताशे के बांटे जाते हैं। नियम यह भी है कि यात्रा के दौरान कोई भी कांवड़िया अपनी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखता। दैनिक कर्म करते समय कांवड़िया कांवड़ को दूसरे व्यक्ति को देता है। यदि कोई भक्त अकेले यात्रा करता है तो वह दैनिक कर्म या विश्राम की अवस्था में कांवड़ को किसी पेड़ पर टांगते हैं। इस तरह से कांवड़ यात्रा संपन्न होती है। 

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rush in kanwar mela last day

कांवड़ यात्रा का इतिहास बहुत पुराना है। परंतु इसे शुरू करने का श्रेय श्रवण कुमार को जाता है। उन्होंने अपने बूढ़े माता-पिता की तीर्थयात्रा करने की इच्छा पर उन्हें कांवड़ में बैठाकर और कांवड़ कंधे पर उठाकर चारों धामों की पैदल यात्रा कराई थी। बाद में लोगों ने इस यात्रा को वर्तमान कांवड़ यात्रा के रूप में जारी रखा।
 

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