भू-धंसाव से जोशीमठ के सबसे बड़े दो होटलों के असुरक्षित होने पर शुरू हुआ ध्वस्तीकरण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अंतिम दीवारों को तोड़ने के साथ ही नगर के यह दो सबसे बड़े और आलीशान होटल अब इतिहास बन चुके हैं। होटल माउंट व्यू को पूरी तरह से तोड़ा जा चुका है, जबकि मलारी इन की कुछ दीवारें तोड़ी जानी शेष हैं। बस मलबे का ढेर साफ करने में कुछ दिन और लगेंगे।
नगर में छह मंजिला मलारी इन और पांच मंजिला माउंट व्यू नगर के सबसे बड़े होटलों में शुमार थे लेकिन अब यह इतिहास बन चुके हैं। आसपास बने दोनों होटल भू-धंसाव से सबसे पहले प्रभावित हुए। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से दोनों होटलों का 12 जनवरी से ध्वस्तीकरण कार्य शुरू किया। करीब 38 दिनों तक चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद रविवार को दोनों होटलों को लगभग ध्वस्त किया जा चुका है।
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माउंट व्यू के बेसमेंट को पूरी तरह तोड़ा जा चुका है जबकि मलारी इन के बेसमेंट की कुछ दीवारों को ही तोड़ा जाना शेष है। 38 दिनों तक चली इस कार्रवाई में लोक निर्माण विभाग के करीब 70 मजदूर और तीन जेसीबी लगातार काम करती रहीं जिसमें करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये खर्च हो चुका है।
लेकिन, सिंहधार वार्ड में जिन घरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने होटल माउंट व्यू और मलारी इन का ध्वस्तीकरण करवाया उनकी हालत अब काफी जर्जर हो चुकी है। स्थिति यह है कि इन मकानों में जाने में भी लोग डर रहे हैं। दीवारों पर गहरी दरारें आने से ज्यादातर मकान तिरछे हो गए हैं।
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होटलों के पीछे के घर में दरार
- फोटो : अमर उजाला
नगर में भू धंसाव का प्रभाव सबसे पहले सिंहधार वार्ड में पड़ा था। यहां के होटल माउंट व्यू और मलारी इन पर दरारें आने से वह तिरछे हो गए थे जिससे इनकी छतें आपस में चिपक गई थीं और आसपास के घरों को खतरा हो गया था। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने सबसे पहले इसी क्षेत्र से लोगों को शिविरों में शिफ्ट किया था।
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जोशीमठ
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद प्रशासन ने दोनों होटलों का ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया। अब ध्वस्तीकरण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन जिन मकानों की सुरक्षा को लेकर यह होटल तोड़े गए वह अब इतने जर्जर हो चुके हैं कि उनके अंदर जाने में भी लोग डर रहे हैं। हालांकि इन घरों में अभी कोई नहीं रहता है। दिगंबर सिंह बिष्ट का मकान तिरछा हो गया है। वह बतातें हैं कि जो भी घर के अंदर जा रहा है घर देखने के बाद उसका सिर चकरा रहा है। भवन स्वामियों का कहना है कि मकान अब गिरने की स्थिति में आ गए हैं।
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जोशीमठ में तिरछे हुए घर
- फोटो : अमर उजाला
नगर में स्नोक्रेस्ट और कॉमेट होटल में दरार आने से उन्हें प्रशासन ने असुरक्षित की श्रेणी में रख दिया था जिसके बाद होटल स्वामियों ने दोनों होटल खाली करा दिए। वहीं दोनों होटल स्वामियों से असुरक्षित का फार्म भी भरवा दिया है लेकिन प्रशासन ने इन होटलों को लेकर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
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एक तरफ को झुका होटल स्नो क्रेट
- फोटो : अमर उजाला
कॉमेट होटल के मालिक देवेश कुंवर और स्नोक्रेस्ट के स्वामी अनिल प्रजापति ने बताया कि प्रशासन ने उनसे होटलों के असुरक्षित के संबंध में फार्म भरवाया है। इनको लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी इसको लेकर उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई है। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पटवाल ने बताया कि सीबीआरआई और जिला प्रशासन के निर्देश के बाद ही अन्य होटलों के ध्वस्तीकरण की योजना तैयार की जाएगी।