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पुलवामा हमला: रिटायरमेंट के बाद देश के लिए ये काम करना चाहता था शहीद, अधूरी रह गई ये आखिरी इच्छा 

Sun, 17 Feb 2019 09:41 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 17 Feb 2019 09:41 AM IST
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martyr mohal lal raturi

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में बृहस्पतिवार को सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले में उत्तराखंड के उत्तरकाशी निवासी मोहन लाल रतूड़ी के शहीद होने की खबर से चिन्यालीसौड़ ब्लाक का बनकोट गांव शोक में डूब गया। 


 

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शहीद मोहन लाल रतूड़ी के करीबी बनकोट निवासी प्यार सिंह, विनोद, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि वे बहुत ही मिलनसार एवं धार्मिक प्रवृत्ति के थे। सेना में भर्ती होने से पहले वे गांव की रामलीला में भगवान राम का पात्र निभाते थे। देश सेवा की इच्छा के चलते वह पारंपरिक कृषि एवं पुरोहित कार्य छोड़कर सेना में भर्ती हुए थे। 

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martyr

बच्चों को पढ़ाई के लिए परिवार को देहरादून ले जाने के बावजूद उन्होंने गांव से नाता नहीं तोड़ा। आजकल वे गांव में अपना नया मकान बनवा रहे थे। इसकी देखरेख के लिए बीते दिसंबर में वे गांव आए थे। तब उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौट कर खेती-बागवानी तथा समाजसेवा करने की इच्छा जताई थी।

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शहीद का परिवार देहरादून में रहता है। गांव में रह रहे करीबी परिजन भी यह खबर पाते ही देहरादून रवाना हो गए। ग्रामीणों ने आतंकी हमले पर गहरा रोष जताते हुए सरकार से आतंकवादियों को करारा सबक सिखाने की मांग की। देहरादून से शहीद एएसआई मोहन लाल के भतीजे सूर्यप्रकाश ने शुक्रवार सुबह फोन पर उनकी शहादत की सूचना परिजनों एवं ग्रामीणों को दी। सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक छा गया। 

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martyr - फोटो : अमर उजाला

शहीद की भाभी पूर्णमासी देवी, बहन माया देवी, भतीजी सुनैना आदि करीबी परिजन तत्काल देहरादून रवाना हो गए। शहीद का परिवार देहरादून में रहता है, जबकि उनकी भाभी समेत अन्य रिश्तेदार गांव में ही रहते हैं।  शहीद की भाभी पूर्णमासी देवी ने बताया कि शहीद के पिता मंगलानंद रतूड़ी का आठ वर्ष पूर्व और माता जसोदा देवी का पांच वर्ष पूर्व ही निधन हुआ था। 

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