जीवन में सफलता का मूलमंत्र है मेहनत। मातृशक्ति खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी खूब नाम कमा रही हैं। उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला ऐपण को कई महिलाओं और युवतियों ने रोजगार का जरिया बनाया। इससे विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी ऐपण कला का जहां संवर्धन और संरक्षण हो रहा है वहीं कई हुनरमंद हाथों को काम भी मिला है। ये इन मातृशक्ति के हुनर का ही कमाल है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ-साथ अन्य सरकारी दफ्तरों में ऐपण से सुसज्जित नेमप्लेट लगाई जा रही हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी युवतियों से रूबरू कराएंगे जिन्होंने ऐपण के माध्यम से नई पहचान बनाई है...
महिला दिवस 2021 : संस्कृति की ‘भक्ति’ से आगे बढ़ रही मातृशक्ति, उत्तराखंड सरकार ने भी सराहा, तस्वीरें
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पूजा पडियार : भीमताल निवासी पूजा पडियार ने ऐपण को एक नई पहचान दिलाई है। स्कूल के समय से कला में रुचि रखने वाली पूजा ने अपनी दादी और मां से सीखा। सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, अभिनेता रोनित रॉय सहित तमाम बड़ी हस्तियां उनकी कला की सराहना कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री की पहल के बाद इन दिनों उनके पास ऐपण नेमप्लेट बनाने के काफी ऑर्डर आ रहे हैं।
हेमलता कांडपाल : ऐपण कलाकारों में हेमलता का नाम भी जाना पहचाना है। अभिनेता मनोज वाजपेयी को ऐपण भेंट कर सुर्खियों में आई हेमलता समय-समय पर युवाओं को ऐपण प्रशिक्षण भी दे रही हैं। मुक्तेश्वर निवासी हेमलता एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से बीएफए पूरा कर लिया है। फिलहाल वह एमएफए कर रही हैं। अपने साथ वह क्षेत्रीय युवाओं को भी ऐपण के जरिये आमदनी अर्जित करने में मदद कर रही हैं।
कुंजिका की ऐपण कला के क्या कहने
चंपावत जिले के लोहाघाट की रहने वाली कुंजिका वर्मा ऐपण कला को नया मुकाम दिला रही हैं। अपनी बनाई ऐपण पेंटिंग को फेसबुक और अपनी यूट्यूब चैनल कुंज आर्ट्स वर्क के जरिये लोगों के साथ साझा करती हैं। फेसबुक पेज के जरिये कुंजिका की ओर ऐपण राखियों को भी खूब सराहा गया, तथा उन्हें कई ऑर्डर भी मिले। नंदा अष्टमी महोत्सव में तथा नवरात्र में उन्होंने ऐपण कला से देवियों की पेंटिंग भी बनाई। उनके यूट्यूब चैनल कुंज आर्ट्स वर्क को भी काफी पसंद किया जा रहा है। यही वजह है कि अब उन्हें यू ट्यूब से विज्ञापन भी मिलने लगे हैं। इसके अलावा कुंजिका चाबी के छल्ले, ऐपण और पेंटिंग बनाकर भी ऑनलाइन बेचती हैं।
खुशबू के ऐपण जर्मनी तक पहुंचे
समय बीतने के साथ अल्मोड़ा की बेटी खुशबू जोशी में कला प्रेम बढ़ा और हाथों में ऐसा हुनर आ गया कि अब यही ऐपण उनकी पहचान बन चुके हैं। देश ही नहीं अब जर्मनी, अमेरिका समेत अन्य विदेशी शहरों में भी उनके उकेरे ऐपण की मांग बढ़ने लगी है। जर्मनी में रहने वाला एक व्यक्ति खुशबू के बनाए दो लक्ष्मी चौकी ले गया और उसने श्री यंत्र बनाने का ऑर्डर दिया। नगर के जाखनदेवी निवासी खुशबू जोशी अब तक लक्ष्मी चौकी, दुर्गा चौकी, श्री गणेश, स्वास्तिक चौकी, स्नान चौकी, तोरण आदि ऐपण बनाए हैं। खुशबू को कपड़े और लकड़ी दोनों पर ऐपण बनाने में महारत हासिल है। खुशबू ने बताया कि चौथी कक्षा में पढ़ने के दौरान ही मैंने दीये पर पेंटिंग करना शुरू कर दिया था। साथ ही घर में मां लक्ष्मी के पैर बनाती थी। ऐपण को लेकर खुशबू अपनी माता प्रेमा जोशी से कई सवाल पूछती थीं।
ममता की कला भी हो रही प्रचलित
अल्मोड़ा नगर की पूर्वी पोखरखाली निवासी ममता मेहता ड्राइंग में एमए और बीएड कर चुकीं हैं और अब ऐपण कला को पहचान दिलाने में जुटी हैं। ममता ने बताया कि उनके कपड़े पर बनाए गए ऐपण दिल्ली, पिथौरागढ़, चंपावत, लखनऊ, जम्मू समेत तमाम शहरों तक पहुंच चुके हैं ज्यादातर लोग कपड़े पर बनाए गए ऐपणों को पसंद कर रहे हैं। ममता ने ऐपण को ही स्वरोजगार का जरिया बना लिया है। कपड़े पर बने ऐपण दो से चार हजार रुपये तक में बिकते हैं, जबकि बड़े साइज के ऐपणों की बिक्री आठ से दस हजार रुपये में होती है। एलआईसी में कार्यरत पिता गुलाब सिंह मेहता और स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त माता राधिका बेटी को काम में पूरा सहयोग करते हैं।