चीन सीमा पर स्थित देश के अंतिम गांव माणा में रौनक फिर से लौट रही है। तो देर क्यों, आप भी यहां आकर कर लीजिए दीदार...
लौटने लगी देश के अंतिम गांव में रौनक, आपको भी करना है खूबसूरत वादियों का दीदार तो चले आइए...
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बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि नजदीक आते ही माणा गांव के ग्रामीण अपने पैतृक गांव को लौट आते हैं। ग्रामीण छह माह तक बदरीनाथ धाम की सेवा में लगे रहते हैं। माणा गांव में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। शीतकाल में माणा गांव बर्फ से ढक जाता है, जिसके चलते ग्रामीण जिले के निचले क्षेत्रों में पांडुकेश्वर, जोशीमठ, घिंघराण, गोपेश्वर, सरतोली और देवलीबगड़ में रहते हैं। ग्रीष्मकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के बाद माणा गांव के ग्रामीण भी अपने पैतृक गांव जाने के लिए उत्साहित रहते हैं।
बदरीनाथ धाम में ग्रामीण तीर्थयात्रियों को तुलसी और वन फूलों की माला उपलब्ध कराते हैं। साथ ही ऊनी वस्त्र बनाकर तीर्थयात्रियों को मुहैया कराते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। पांडुकेश्वर गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग चंद्र सिंह पंवार कहते हैं कि पहले बदरीनाथ तक सड़क नहीं थी तब ग्रामीण करीब बीस किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर बदरीनाथ पहुंचते थे। अब माणा तक जाने के लिए रास्ता सुगम हो गया है।
बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 30 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे, लेकिन धाम में अटूट श्रद्धा रखने वाले तीर्थयात्रियों के पहुंचने का सिलसिला अभी से शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को करीब 20 तीर्थयात्रियों का जत्था बदरीनाथ धाम पहुंचा। तीर्थयात्रियों ने दिनभर बदरीनाथ परिसर में विष्णु सहस्रनाम पाठ किया। वहीं, धाम में अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान खुल गए हैं। धाम में साधु-संतों का आना भी शुरू हो गया है।
बृहस्पतिवार को गुजरात के सात और अन्य जगहों से 13 तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। बदरीनाथ धाम के कपाट अभी बंद हैं, लिहाजा तीर्थयात्रियों ने सिंहद्वार पर ही मत्था टेककर विष्णु सहस्रनाम पाठ किया। धाम में इन दिनों मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह और शाम को यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारी और कर्मचारीगण यात्रा तैयारियों को अंतिम रुप देने में लगे हुए हैं। वहीं बदरीनाथ के बस स्टैंड, विजयलक्ष्मी चौक और मुख्य बाजार में अधिकांश दुकानों खुल गई हैं।