राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मसूरी से बेहद लगाव था। उन्होंने यहां सिल्वर्टन ग्राउंड में जनसभा के साथ ही प्रार्थना सभाएं कीं और लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। मसूरी में वह स्वतंत्रता आंदोलन की धार को तेज करने भी आया करते थे।
Independence Day: जनसभाओं से गूंज उठती थी मसूरी, बापू यहीं बनाते थे स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने की रणनीति
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कहा जाता है कि मसूरी की मालरोड पर जब अंग्रेज अफसर घूमने निकलते थे तो उस समय स्थानीय लोग अपने घरों में छिप जाते थे। इस लिहाज से भी महात्मा गांधी का मसूरी आकर आंदोलन की योजना बनाना बहुत मायने रखता था।
महात्मा गांधी पहली बार अक्तूबर 1929 में मसूरी पहुंचे थे। तब स्थानीय लोगों ने महात्मा गांधी का भव्य स्वागत किया था। उस समय महात्मा गांधी हैप्पी वैली में बिडला हाउस में दो दिनों के लिए रुके थे। दूसरी बार महात्मा गांधी 28 मई 1946 में मसूरी आए थे। वह करीब दस दिनों तक हैप्पी वैली में बिडला हाउस में रुके थे। इस दौरान उन्होंने मसूरी के सिल्वर्टन ग्राउंड में जनसभा के साथ ही प्रार्थना सभा की और लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि महात्मा गांधी मसूरी दौरे के दौरान कांग्रेस नेता पुष्कर नाथ तन्खा से मिलकर देश के अन्य बड़े नेताओं के साथ बैठक किया करते थे। उन्होंने बताया कि मसूरी दौरे के दौरान महात्मा गांधी ने हाथ रिक्शा को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। महात्मा गांधी ने कहा था कि हाथ रिक्शा से आदमी, आदमी को खींचता है जो ठीक नही है, इस प्रथा को बंद करना चाहिए।
उन्होंने तत्कालीन नगर पालिका को इसके खिलाफ ज्ञापन भी दिया था। बताया कि महात्मा गांधी को मसूरी दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने चांदी की डांडी और रिक्शा मॉडल भेंट किया था। महात्मा गांधी ने चांदी की डांडी और हाथ रिक्शा मॉडल को उसी समय नीलाम कर दिया और नीलामी से जो आठ सौ रुपये मिले थे, उसे खादी उद्योग से जुड़े लोगों को दान कर दिया था।
- Anupam Kher (@anupampkher) 14 Aug 2022