शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...। इस बलिदानी शायरी के बीच पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए रियासीबमन गांव के 18 कुमाऊं रेजीमेंट के फौजी राहुल रैंसवाल का बृहस्पतिवार को सैन्य सम्मान के साथ डिप्टेश्वर घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अंति यात्रा में शामिल हर व्यक्ति ने पाक विरोधी नारे लगाए।
चिता को मुखाग्नि शहीद के रिश्ते के दादा राजेंद्र सिंह और जय सिंह ने दी। हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। ऑर्डिनेंस यूनिट ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सेना के बैंड ने मातमी धुन से श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद राहुल की अंतिम यात्रा में पहली बार वर्जनाएं तोड़ कर अधिकतर महिलाएं श्मशान घाट पहुंचीं। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़े। अंत्येष्टि में शामिल हर व्यक्ति फूट-फूट कर रोया।
बता दें कि नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के रियासीबमन गांव निवासी राहुल रैंसवाल (26) की जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 21 जनवरी को आतंकियों से हुई मुठभेड़ में शहादत हो गई थी। आतंकियों को खोज उन्हें ढेर करने का प्रयास करने के दौरान राहुल पर मकान में एक महिला के पीछे छिपे आतंकी ने हमला कर दिया। आतंकियों की गोली सीधे राहुल के माथे पर लगी।
बृहस्पतिवार सुबह वायुसेना के हेलीकॉप्टर से शहीद राहुल रैंसवाल की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को चंपावत स्थित एसएसबी की पंचम वाहिनी लाया गया। कश्मीर से आरआर (राष्ट्रीय राइफल्स) यूनिट के नायब सूबेदार तारा दत्त और राजेंद्र भट्ट शहीद राहुल की पार्थिव देह लेकर यहां पहुंचे। पत्नी प्रीति, मां हरू देवी, फौजी भाई राजेश और दोनों बहनों सहित परिवार के तमाम लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
दोपहर में कनलगांव से डिप्टेश्वर घाट तक शव यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। भारी मन से रिश्ते के दोनों बुजुर्गों ने चिता को मुखाग्नि दी। जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल तेरा नाम रहेगा... के नारे गूंजते रहे। शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन को जन सैलाब उमड़ पड़ा और वहां से डिप्टेश्वर घाट तक अमर शहीद के नारों से शहर गूंज उठा।