तीन साल के आंदोलन के बाद एक दिसंबर 1973 को स्थापित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय आज 50वें साल में प्रवेश कर गया। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गढ़वाल मंडल के लोगों ने भूख हड़ताल और गिरफ्तारियां दी। स्थापना काल से अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राएं यहां से डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।
HNB Garhwal University: आंदोलन के बल पर हासिल गढ़वाल विवि का 50वें साल में प्रवेश, आज पलटे इतिहास के पन्ने
सत्याग्रहियों ने प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दीं
26 जुलाई को 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए श्रीनगर में मातृ शक्ति ने भूख हड़ताल की। 16 सितंबर 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए समूचा गढ़वाल मंडल बंद कराया गया। विश्वविद्यालय के लिए उत्तरकाशी, पौड़ी, देहरादून, चमोली और टिहरी जिलों में आंदोलन हुए। विभिन्न स्थानों में सत्याग्रहियों ने प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दीं। स्वामी मन्मथन और कुंज विहारी नेगी को गिरफ्तार कर रामपुर जेल भेज दिया गया। लंबे आंदोलन के फलस्वरूप 23 नवंबर 1973 को उत्तर प्रदेश शासन ने श्रीनगर में राज्य विश्वविद्यालय स्थापना की अधिसूचना जारी की। एक दिसंबर 1973 से विश्वविद्यालय विधिवत रूप से संचालित होने लगा।
विधान सभा में आया था स्थगन प्रस्ताव
श्रीनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 16 सितंबर 1971 में उत्तर प्रदेश विधान सभा में 23 विधायक कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाए थे। विधायकों ने तत्काल लोक महत्व के प्रश्न पर विचार करने की मांग की थी।
तीन परिसर हो रहे संचालित
स्थापना काल में बिड़ला परिसर श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय के अधीन था। इसके बाद पौड़ी और टिहरी मेें भी परिसर स्थापित किए गए। बिड़ला परिसर का विस्तार अलकनंदा नदी के पार चौरास में किया गया। वर्ष 1989 में गढ़वाल विश्वविद्यालय का नामकरण पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम पर कर दिया गया।
2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा
एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को 15 जनवरी 2009 को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। पांच संकाय से शुरू हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद 14 संकाय हो चुके हैं।
बीडी भट्ट पहले कुलपति
बीडी भट्ट को गढ़वाल विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बनने का गौरव प्राप्त है। वह वर्ष 1973 से 1977 तक कुलपति रहे। मेजर एसपी शर्मा यहां पहले कुलसचिव बने।
गढ़वाल विश्वविद्यालय को 49 साल पूरे हो गए हैं। 50वें साल में प्रवेश करने पर साल भर स्वर्णजयंती कार्यक्रम चलेंगे। विश्वविद्यालय आंदोलन संबंधी अभिलेखों को संकलित किया जा रहा है। -डॉ. एसएस बिष्ट, संयोजक अभिलेखीकरण समिति गढ़वाल विश्वविद्यालय