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HNB Garhwal University: आंदोलन के बल पर हासिल गढ़वाल विवि का 50वें साल में प्रवेश, आज पलटे इतिहास के पन्ने

Thu, 01 Dec 2022 04:12 PM IST
रेनू सकलानी संदीप थपलियाल, संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
संदीप थपलियाल, संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 01 Dec 2022 04:12 PM IST
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HNB Garhwal University inspirational Story Convocation 2022 Srinagar 1st December Uttarakhand news in hindi
सन् 1971 में गढ़वाल विवि के लिए संघर्ष करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

तीन साल के आंदोलन के बाद एक दिसंबर 1973 को स्थापित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय आज 50वें साल में प्रवेश कर गया। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गढ़वाल मंडल के लोगों ने भूख हड़ताल और गिरफ्तारियां दी। स्थापना काल से अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राएं यहां से डिग्री प्राप्त कर चुके हैं। 



विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले गढ़वाल मंडल के छात्रों को इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए कानपुर, आगरा और लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। इसलिए श्रीनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए वर्ष 1971 से 1973 के बीच आंदोलन चला।

आंदोलन के लिए वर्ष 1971 में उत्तराखंड विश्वविद्यालय केंद्रीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी स्वामी मन्मथन और स्वामी ओंकारानंद को दी गई। समिति में प्रेम लाल वैद्य, प्रताप पुष्पवाण, विद्या सागर नौटियाल, कृष्णानंद मैठाणी, वीरेंद्र पैन्यूली, कुंज विहारी नेगी, जयदयाल अग्रवाल, ऋषि बल्लभ सुंदरियाल और कैलाश जुगराण को जिम्मेदारियां सौंपी गई।

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गढ़वाल विवि के आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

सत्याग्रहियों ने प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दीं
26 जुलाई को 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए श्रीनगर में मातृ शक्ति ने भूख हड़ताल की। 16 सितंबर 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए समूचा गढ़वाल मंडल बंद कराया गया। विश्वविद्यालय के लिए उत्तरकाशी, पौड़ी, देहरादून, चमोली और टिहरी जिलों में आंदोलन हुए। विभिन्न स्थानों में सत्याग्रहियों ने प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दीं। स्वामी मन्मथन और कुंज विहारी नेगी को गिरफ्तार कर रामपुर जेल भेज दिया गया। लंबे आंदोलन के फलस्वरूप 23 नवंबर 1973 को उत्तर प्रदेश शासन ने श्रीनगर में राज्य विश्वविद्यालय स्थापना की अधिसूचना जारी की। एक दिसंबर 1973 से विश्वविद्यालय विधिवत रूप से संचालित होने लगा। 

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गढ़वाल विश्वविद्यालय - फोटो : file photo

विधान सभा में आया था स्थगन प्रस्ताव
श्रीनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 16 सितंबर 1971 में उत्तर प्रदेश विधान सभा में 23 विधायक कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाए थे। विधायकों ने तत्काल लोक महत्व के प्रश्न पर विचार करने की मांग की थी। 

तीन परिसर हो रहे संचालित
स्थापना काल में बिड़ला परिसर श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय के अधीन था। इसके बाद पौड़ी और टिहरी मेें भी परिसर स्थापित किए गए। बिड़ला परिसर का विस्तार अलकनंदा नदी के पार चौरास में किया गया। वर्ष 1989 में गढ़वाल विश्वविद्यालय का नामकरण पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम पर कर दिया गया। 

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दीक्षांत समारोह शुरू - फोटो : अमर उजाला

2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा
एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को 15 जनवरी 2009 को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। पांच संकाय से शुरू हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद 14 संकाय हो चुके हैं।

 

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गढ़वाल विवि का दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला

बीडी भट्ट पहले कुलपति
बीडी भट्ट को गढ़वाल विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बनने का गौरव प्राप्त है। वह वर्ष 1973 से 1977 तक कुलपति रहे। मेजर एसपी शर्मा यहां पहले कुलसचिव बने। 

गढ़वाल विश्वविद्यालय को 49 साल पूरे हो गए हैं। 50वें साल में प्रवेश करने पर साल भर स्वर्णजयंती कार्यक्रम चलेंगे। विश्वविद्यालय आंदोलन संबंधी अभिलेखों को संकलित किया जा रहा है। -डॉ. एसएस बिष्ट, संयोजक अभिलेखीकरण समिति गढ़वाल विश्वविद्यालय

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