कांग्रेस के खांटी नेता माने जाने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत जब भगवा ओढ़कर मंदिर पहुंच गए और भजन कीर्तन शुरु कर दिया तो दोनों पार्टियों में खलबली मच गई।
आखिर भगवा ओढ़कर भजन-कीर्तन क्यों करने लगे ये कांग्रेसी नेता, दोनों पार्टियों में मची खलबली
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वाल्मीकि मंदिर से अपना अलग सियासी अभियान शुरू करने वाले हरीश रावत पूरी तरह मंदिर पॉलिटिक्स पर रमने जा रहे हैं। सोमवार को उन्होंने टपकेश्वर मंदिर में भगवा ओढ़कर भगवान का भजन कीर्तन किया। फिर वह लक्ष्मण सिद्ध मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंचे। जिस तरह से उन्होंने मंदिरों में जाने का सिलसिला शुरू किया है, वह एक-दो मंदिरों तक सीमित नहीं रहने वाला।
बकौल हरीश रावत, वह प्रदेश के तमाम मंदिरों में जाएंगे। जनता और जनार्दन की शरण में जाकर मोदी मॉडल तलाशने की बात हरीश रावत ने दोहरायी। हरीश रावत की इस मंदिर पॉलिटिक्स पर भाजपा ने यह कहकर कटाक्ष किया कि कांग्रेस ने जो पाप किए, मंदिर जाकर वह उनका प्रायश्चित कर रही है।
हरीश रावत ने रविवार को वाल्मीकि मंदिर में पूजा अर्चना से शुरुआत की। सोमवार को वह टपकेश्वर महादेव के मंदिर पहुंचे। जिस भगवा राजनीति को सांप्रदायिकता का नाम देकर कांग्रेस कोसती रही है, उसी भगवे के कंधे पर ओढ़कर हरीश रावत भगवान की भक्ति रस में डूब गए ।
करीब ढाई घंटे वह टपकेश्वर महादेव के मंदिर में रहे। यहां से वह अपने अनुयायियों के लक्ष्मण सिद्ध मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने पूजा अर्चना की और उसके बाद भंडारे में शामिल हुए। मंगलवार को उनका हरिद्वार के सभी प्रमुख मंदिरों में पूजा अर्चना का कार्यक्रम है। बकौल हरीश रावत,‘ वह जनता और जनार्दन के दर पर जाकर मोदी मॉडल की तलाश कर रहे हैं कि आखिर वह कहां है?