हरिद्वार में नगर निगम बदहाली के आंसू रो रहा है। नगर निगम भवन की छत की लीकेज बंद करने के लिए नौ लाख रुपये खर्च करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद छत पहले की तरह टपकने लगी और कर्मचारियों को काम करना मुश्किल हो गया। कई कर्मचारियों को तो कार्यालय के अंदर छाता खोलकर काम करना पड़ा।
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नगर निगम में छाता लेकर किया काम
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम प्रशासन ने आठ महीने पहले बोर्ड फंड से नौ लाख रुपये खर्च करके छत पर नया लेंटर डलवाया था। नौ लाख रुपये की छत शनिवार को तेज बारिश में टपकने लगी। गृहकर अनुभाग के संयुक्त कार्यालय के अंदर पानी पानी होने के कारण कर्मचारी काम नहीं कर पाए।
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कर्मचारियों को अभिलेख भीगने से बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। कर्मचारियों ने छाता खोलकर किसी तरह से फाइलों को बचाया। गृहकर अनुभाग के साथ ही नगर निगम की कोई छत ऐसी नहीं है जो टपक न रही हो। ढाल ठीक नहीं होने से छतों में पानी भरा हुआ है।
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इसलिए बारिश बंद होने के बाद भी छत से पानी टपकता रहता है। नाराज कर्मचारियों ने छतों की मरम्मत पर खर्च हुए लाखों रुपये के जांच कराने की मांग की है। कर्मचारी अखिलेश शर्मा, आदेश यादव डॉ. सुभाष सैनी, रामअवतार, प्रवीण कुमार, संजीव कुमार, ने बताया कि कार्यालय भवन के अंदर बैठने की भी स्थिति नहीं है। कर्मचारियों ने नगर आयुुक्त उदय सिंह राणा से भी शिकायत की है।
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नगर आयुक्त का कहना है कि इसकी जांच करवाई जाएगी कि आखिर नौ लाख रुपये खर्च करने के बाद भी छत कैसे टपक रही है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने नगर निगम के लिए तीन मंजिला भवन का शिलान्यास नगर निगम के चुनाव के दौरान किया था। तब उन्होंने बताया था कि 13 करोड़ रुपये की लागत से हरिद्वार नगर निगम का प्रदेश में सबसे शानदार भवन बनेगा।