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हरिद्वार कुंभ 2021 : कुंभ अवधि को लेकर सदियों पुरानी है संन्यासियों और बैरागियों की रार, तस्वीरें

Mon, 19 Apr 2021 11:24 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 19 Apr 2021 11:24 AM IST
सार

संन्यासियों के वर्चस्व वाले हरिद्वार में बैरागियों को कई बार कुंभ पर स्नान नहीं करने दिया गया।

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Haridwar Kumbh Mela 2021 : dispute on kumbh time between sanyasi and bairagi akharas since long time
शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

कुंभ अवधि को लेकर नागा संन्यासियों और बैरागी संतों का विवाद सदियों पुराना है। भले ही शिव और राम एक-दूसरे के भक्त हों, लेकिन शैव संन्यासी और रामानंदी वैष्णव बैरागी अनेक कुंभ मेलों में संघर्ष करते आए हैं। संन्यासियों के वर्चस्व वाले हरिद्वार में बैरागियों को कई बार कुंभ पर स्नान नहीं करने दिया गया। अनेक बार वे हरकी पैड़ी पर कुंभ नहीं नहा पाए और चंडी घाट पर नीलधारा में स्नान कर लौट गए। बाद में तो बैरागियों ने हरिद्वार आने के बजाय वृंदावन में कुंभ मनाना शुरू कर दिया था। आज भी बैरागी हरिद्वार आने से पहले उस समय स्थापित परंपरा का पालन करते हुए वृंदावन में एक महीने का कुंभ मनाते हैं। नासिक में भी संन्यासियों के स्नान त्रयंबकेश्वर में होते हैं और नासिक की गोदावरी में केवल बैरागी अखाड़ों का स्नान होता है। दोनों शाखाओं के संत एक स्नान में भी साथ-साथ नहीं आते। वर्ष 1760 के हरिद्वार कुंभ में दोनों के बीच हिंसक संघर्ष हुए थे। भीषण हिंसा में दोनों संप्रदायों के हजारों साधु मारे गए थे। उस दौरान गरीबदासी संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य गरीबदास स्वयं हरिद्वार में थे। इस हिंसक घटना से वे इतने आहत हुए कि वहृदेग्रन्थ की रचना हरिद्वार के गंगा तट पर की। इसमें उन्होंने दोनों संप्रदायों के प्रति कटु शब्दों का भी प्रयोग किया।

Haridwar Kumbh Mela 2021 : dispute on kumbh time between sanyasi and bairagi akharas since long time
शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

बाद में अंग्रेज सरकार ने अखाड़ों के स्नान क्रम बनाए। पिछली शताब्दी में अखाड़ा परिषद बनने के बाद सब सामान्य हुआ। 

Haridwar Kumbh Mela 2021 : dispute on kumbh time between sanyasi and bairagi akharas since long time
शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि 27 अप्रैल के शाही स्नान में तीनों वैष्णव अखाड़ों के साथ श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन, श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के साथ श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के संत भी शामिल होंगे। 

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Haridwar Kumbh Mela 2021 : dispute on kumbh time between sanyasi and bairagi akharas since long time
शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

श्रीमहंत राजेंद्र दास ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि 27 अप्रैल के शाही स्नान में केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। परंपराओं के साथ ही देवताओं को स्थापित और विसर्जित किया जाता है।

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Haridwar Kumbh Mela 2021 : dispute on kumbh time between sanyasi and bairagi akharas since long time
शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

असमय कुंभ का विसर्जन परंपराओं के विरुद्ध है। महाकुंभ समाप्ति की घोषणा करने वाले संत परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

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