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Exclusive तस्वीरें: जलवायु परिवर्तन से गोमुख में टूट रहे ग्लेशियर

Fri, 08 Jul 2016 08:35 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 08 Jul 2016 08:35 AM IST
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glacier broken behind gaumukh
glacier broken behind gaukumkh - फोटो : amar ujala

जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर और अधिक स्पष्ट होने लगा है। ग्लेशियरों पर दरारों की संख्या बढ़ रही  है। इन दरारों के अधिक बढ़ने पर ग्लेशियर टूटते जा रहे हैं। गोमुख के पीछे कुछ इस तरह है ग्लेशियर की स्थिति।

हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर

glacier broken behind gaumukh
glacier broken behind gaukumkh

ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र के तापमान में आया बदलाव ग्लेशियरों की सेहत के लिए और कष्ट कारक हो गया है। ग्लेशियरों पर शोध कर रहे विज्ञानियों का कहना है कि अचानक सर्दी-गर्मी से ग्लेशियरों पर स्ट्रेस बढ़ रहा है जिससे दरारें आ जाती हैं। गोमुख के पीछे ग्लेशियर पिघलने से कुछ इस तरह बन रही छोटी झील।

हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर

glacier broken behind gaumukh
glacier broken behind gaukumkh
उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर दरारें पाई गई हैं। तापमान के उतार-चढ़ाव के साथ हिमालयी क्षेत्र में चल रही भूगर्भीय गतिविधियों का असर भी ग्लेशियरों पर आ रहा है। गोमुख में कुछ इस तरह से टूट रहे ग्लेशियर।
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हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर

glacier broken behind gaumukh
ग्लेशियरों में आवाजाही रोकी - फोटो : अमर उजाला
भूगर्भ की ‘टेक्टोनिक प्लेट’ जैसे ही चाल बदलती हैं ग्लेशियर पर प्रेशर आ जाता है, जहां ग्लेशियर बॉडी हल्की होती है वहां दरार आ जाती है। विज्ञानियों का कहना है कि ग्लेशियर पर ‘डबल स्ट्रेस’ पड़ रहा है। इससे हल्की दरारें बड़ी हो जाती हैं और ग्लेशियर टूट जाता है।

 

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हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर

glacier broken behind gaumukh
glaciers - फोटो : Getty Images

सबसे अधिक प्रभाव मध्य हिमालयी क्षेत्र के गोमुख ग्लेशियर पर है। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। ग्लेशियरों की केमिस्ट्री पर काम कर रहे वरिष्ठ विज्ञानी डा. समीर तिवारी का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र का तापमान बढ़ा है और इसमें उतार-चढ़ाव अधिक हो गया है।

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