जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर और अधिक स्पष्ट होने लगा है। ग्लेशियरों पर दरारों की संख्या बढ़ रही है। इन दरारों के अधिक बढ़ने पर ग्लेशियर टूटते जा रहे हैं। गोमुख के पीछे कुछ इस तरह है ग्लेशियर की स्थिति।
हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर
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glacier broken behind gaukumkh
ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र के तापमान में आया बदलाव ग्लेशियरों की सेहत के लिए और कष्ट कारक हो गया है। ग्लेशियरों पर शोध कर रहे विज्ञानियों का कहना है कि अचानक सर्दी-गर्मी से ग्लेशियरों पर स्ट्रेस बढ़ रहा है जिससे दरारें आ जाती हैं। गोमुख के पीछे ग्लेशियर पिघलने से कुछ इस तरह बन रही छोटी झील।
हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर बढ़ा स्ट्रेस, देखिए कैसे टूट रहे हैं ग्लेशियर
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उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर दरारें पाई गई हैं। तापमान के उतार-चढ़ाव के साथ हिमालयी क्षेत्र में चल रही भूगर्भीय गतिविधियों का असर भी ग्लेशियरों पर आ रहा है। गोमुख में कुछ इस तरह से टूट रहे ग्लेशियर।
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ग्लेशियरों में आवाजाही रोकी
- फोटो : अमर उजाला
भूगर्भ की ‘टेक्टोनिक प्लेट’ जैसे ही चाल बदलती हैं ग्लेशियर पर प्रेशर आ जाता है, जहां ग्लेशियर बॉडी हल्की होती है वहां दरार आ जाती है। विज्ञानियों का कहना है कि ग्लेशियर पर ‘डबल स्ट्रेस’ पड़ रहा है। इससे हल्की दरारें बड़ी हो जाती हैं और ग्लेशियर टूट जाता है।
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glaciers
- फोटो : Getty Images
सबसे अधिक प्रभाव मध्य हिमालयी क्षेत्र के गोमुख ग्लेशियर पर है। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। ग्लेशियरों की केमिस्ट्री पर काम कर रहे वरिष्ठ विज्ञानी डा. समीर तिवारी का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र का तापमान बढ़ा है और इसमें उतार-चढ़ाव अधिक हो गया है।