गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में संरक्षित वन्य जीवों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। चरवाहों के साथ पहुंचे कुत्ते पार्क क्षेत्र में रहकर हिंसक होने लगे हैं। वे घुरड़, काकड़, चीतल, सांभर और अरगली भेड़ जैसे वन्यजीवों पर हमला कर रहे हैं। इन कुत्तों से हिम तेंदुओं को भी खाना जुटाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
Gangotri National Park: पैदा हुआ नया खतरा, संरक्षित वन्य जीवों को हिंसक होकर अपना शिकार बना रहे कुत्ते
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के लुत्पप्राय प्रजाति प्रबंधन विभाग में वैज्ञानिक डा.एस सत्या कुमार ने बताया कि संस्थान की ओर से नेलांग घाटी में लगाए गए ट्रैप कैमरे में 5 हजार मीटर तक भी ऐसे कुत्ते दिखे हैं। बताया कि ये कुत्ते घुरड़, काकड़, चीतल, सांभर और अरगली भेड़ पर हमला करते हैं। इससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है।
हाल में, नेलांग घाटी से लौटी व संस्थान से जुड़ी शोधार्थी डा.रंजना पाल का कहना है कि झुंड में ये कुत्ते हिम तेंदुओं के शिकार को भी छिनाछपटी कर छीन लेते हैं। इससे हिम तेंदुओं को भी खाना जुटाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। बताया कि ऐसे कुत्तों की गणना नहीं हुुई है। लेकिन सेना और आईटीबीपी के हर कैंप के बाहर ऐसे करीब 15 से 20 कुत्ते मौजूद हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने पिछले वर्ष गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन को नेलांग घाटी के पीडीए, सुमना व मंडी के प्रतिबंधित क्षेत्रों से कुत्तों को हटाने का सुझाव दिया था। लेकिन पार्क प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। यहां खानाबदोश चरवाहों ने पार्क क्षेत्र में दुर्लभ अरगली भेड़ कम दिखने की सूचना दी थी। इसकी वजह भी इन कुत्तों के हमलों को बताया जा रहा था।
किसी भी राष्ट्रीय पार्क में ऐसे कुत्तों का रहना बहुत ही खतरनाक है। इन कुत्तों को पार्क क्षेत्र से बाहर निकालने के साथ इनकी नसबंदी जरूरी है।
- डा.एस.सत्या कुमार, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान।
पार्क क्षेत्र से जंगली बन चुके पालतु कुत्तों को हटाने और नसबंदी के लिए बजट की मांग की गई है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, यह काम किया जाएगा।
- रंगनाथ पांडेय, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क।