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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व सांसद परिपूर्णानंद नहीं रहे, भारत छोड़ो आंदोलन में भी थे शामिल 

Sun, 14 Apr 2019 10:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई टिहरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई टिहरी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 14 Apr 2019 10:15 AM IST
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Freedom fighters and former MP paripurnanand painyuli passed away
फाइल फोटो

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व सांसद परिपूर्णानंद पैन्यूली (96) का आज निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। देहरादून के ओएनजीसी अस्पताल में उन्होंने शनिवार को अंतिम सांस ली।


 

Freedom fighters and former MP paripurnanand painyuli passed away
फाइल फोटो

स्व. पैन्यूली ने आजादी के आंदोलन और टिहरी रियासत को आजाद भारत में विलय कराने में अहम भूमिका निभाई थी। टिहरी जिले में खास पट्टी के ग्राम छोलगांव में 19 नवंबर 1924 को जन्में परिपूर्णानंद पैन्यूली महात्मा गांधी से काफी प्र्रेरित थे। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। क्रांतिकारी और बागावती तेवरों के चलते वह राजद्रोह के आरोप में छह साल तक मेरठ और लखनऊ जेल में बंद रहे।
 

Freedom fighters and former MP paripurnanand painyuli passed away
फाइल फोटो

वर्ष 1946 के दौरान वह टिहरी आकर प्रजामंडल से जुड़ गए थे। इस दौरान राजशाही ने नया भूमि बंदोबस्त शुरू कराया था। जिसके खिलाफ किसानों ने आंदोलन शुरू किया था। तब राजा ने आंदोलन कर रहे दो प्रमुख नेता दादा दौलत राम और परिपूर्णानंद पैन्यूली को टिहरी जेल में बंद कर दिया था। जेल में बंद दोनों क्रांतिकारियों ने 13 सितंबर 1946 को अपनी तीन मांग रजिस्ट्रेशन एक्ट रद्द करने, वयस्क मताधिकार पर चुनाव कराने और पुलिस अत्याचारों की जांच कराने की मांग को लेकर जेल में ही बंद भूदेव लखेड़ा, इंद्र सिंह, टीकाराम भट्ट आदि के साथ भूखहड़ताल शुरू कर दी थी। देशी राज्य लोक परिषद के नेता जयनारायण व्यास के अनुरोध पर इन नेताओं ने 22 सितंबर 1946 को भूखहड़ताल समाप्त की।
 

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Freedom fighters and former MP paripurnanand painyuli passed away
फाइल फोटो

प्रजामंडल से समझौते के बावजूद राजशाही ने अपनी दमनकारी नीति जारी रखी। 27 नवंबर 1946 को रियासत के मजिस्ट्रेट ने पैन्यूली को डेढ़ वर्ष की कारावास और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। उनके साथ ही अवतार सिंह को पांच वर्ष और महताब सिंह को तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी। 10 दिसंबर 1946 को परिपूर्णानंद पैन्यूली टिहरी जेल से फरार होकर रियासत से बाहर दिल्ली चले गए थे। टिहरी रियासत को आजाद भारत में विलय कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्व. पैन्यूली प्रजामंडल के अध्यक्ष भी रहे। टिहरी रियासत के खिलाफ लड़ाई लडने वाले परिपूर्णानंद पैन्यूली 1971 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और टिहरी रियासत के महाराजा मानवेंद्र शाह को हराकर लोकसभा पहुंचे थे।
 

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Freedom fighters and former MP paripurnanand painyuli passed away
फाइल फोटो

टिहरी के प्रखर सांसद रहे परिपूणानंद पैन्यूली ने दलितोत्थान के लिए लगातार संघर्ष किया। वह उत्तराखंड हरिजन सेवा संघ और जगजीवन राम ट्रस्ट के भी अध्यक्ष रहे हैं। लेखक व पत्रकार रहे स्व. पैन्यूली टिहरी के विकास के लिए सैदव संघर्षशील रहे। 
- विक्रम बिष्ट,वरिष्ठ पत्रकार नई टिहरी

पूर्व सांसद पैन्यूली के निधन पर जताया शोक 
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व सांसद परिपूर्णानंद पैन्यूली के निधन पर जिले के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताया है। उनके निधन पर कॉमरेड बच्चीराम कंसवाल, पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय, पूर्व मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी, पूर्व मंत्री दिनेश धनै, पूर्व विधायक विक्रम सिंह नेगी, जिलाध्यक्ष सूरज राणा, शांति प्रसाद भट्ट, साब सिंह सजवाण, जय प्रकाश पांडेय,पूर्व प्रमुख जगदंबा रतूड़ी, राकेश राणा, दर्शनी रावत, विजय जड़धारी, धूम सिंह नेगी ,वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बिष्ट, महीपाल नेगी, प्रेस क्लब अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, देवेंद्र दुमोगा, प्रवीण भंडारी, भागवत बिष्ट, पालिकाध्यक्ष सीमा कृषाली, उमेशचरण गुसाईं, प्रमुख विजय गुनसोला, बचल सिंह रावत, मुरारीलाल खंडवाल, जगदंबा रतूड़ी और मोहन सिंह रावत ने गहरा शोक व्यक्त किया है। 

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