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फांसी का नाम सुनकर बढ़ गया था वजन, जानिए ऐसे वीर की कहानी...

Tue, 16 Aug 2016 08:00 AM IST
निर्मला सुयाल (नेहा) / अमर उजाला देहरादून
निर्मला सुयाल (नेहा) / अमर उजाला देहरादून Updated Tue, 16 Aug 2016 08:00 AM IST
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freedom fighter shaheed veer keshari chand
shaheed veer keshari chand

15 अगस्त 1947 से लेकर आज तक भारत अपनी आजादी के 70 साल का सफर आजाद भारत तय कर चुका है। आजादी के जश्न के मौके पर आपको ऐसे ही वीर की गाथा सुनाते हैं, जिसने 24 साल की उम्र में भारत मां की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चुन लिया। भारत के इस वीर सपूत का नाम शहीद वीर केशरी चंद था।

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3 मई 1945 को वीर केशरी चंद ने हंसते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया। उस समय उनकी उम्र मात्र 24 वर्ष छह महीने थी। बताते हैं कि 3 माह जेल में रहने पर उनका वजन ढाई किलो बढ़ गया था। आज वीर शहीद केशरी चंद की याद में देहरादून के चकराता में रामताल गार्डन में हर वर्श 3 मई को मेले का आयोजन किया जाता है।

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केशरी का जन्म 1 नवंबर 1920 को उत्तराखंड के देहरादून जिले के जनजातिय क्षेत्र जौनसार बावर के ग्राम क्यावा में पंडित षिव दत्त के घर हुए। उस दौरान क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोग उंगली पर गिने जाते थे। उनमें से एक केशरी के पिता शिव दत्त भी थे। वह पेशे से अध्यापक थे। केशरी के पिता चाहते थे कि वह पढ़ लिखकर एक बहुत बड़ा अधिकारी बन उनका नाम रोशन करे। लेकिन उसकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

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केशरी के अंदर फौज में जाकर देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी। लाख समझाने के बावजूद भी केशरी नहीं माने। और 10 अप्रैल 1941 को वह रॉयल इंडियन आर्मी सर्विस कोर में सूबेदार के पद पर भर्ती हो गए। इसी साल केषरी ने वॉयसरॉय कमीशन ऑफिसर का कोर्स पूरा किया।

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दूसरे विश्व युद्ध में उन्हें मलाया भेजा गया। इस दौरान 15 फरवरी 1942 को जापानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया। इसके बाद वी सुभाश चंद बोस के संपर्क में आए और उनसे अतिप्रभावित होकर भारत की आजादी का सपना साकार करने के मकसद से आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। (हर साल धूमधाम से लगता है मेला)

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