महाभारत काल की कई घटनाओं से जुड़ा होने के कारण भारत के इस गांव को सबसे पुराना गांव माना जाता है। यहां बहने वाली पावन सरस्वती नदी इंसान का रूप धर लेती है। तस्वीरों में देखें...
यहां नदी धर लेती है इंसान का रूप, तस्वीरें गवाह हैं...
माणा गांव से थोड़ी दूर पर सरस्वती नदी है। यहां नदी तेज वेग के साथ बहती है। लेकिन पानी कम होने के बाद यहां अद्भुत नजारा दिखाई देता है।
यहां पानी कम होने पर नदी में इंसान का चेहरा दिखाई देता है। जो अपने आप में अद्भुत दृश्य लगता है। इस नदी पर पत्थर से बना पुल है। इसे भीमपुल कहते हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्गारोहिणी के लिये आगे बढ़ रहे थे तो द्रौपदी सरस्वती नदी को पार नहीं कर पायी। पांडवों ने इसके बाद सरस्वती से रास्ता देने का आग्रह किया लेकिन सरस्वती नहीं मानी।
पांडवों में सबसे बलशाली भीम ने तब दो बड़े पत्थर लुढकाकर पुल बना दिया। भीम ने तब अपनी गदा जोर से सरस्वती नदी पर मारी थी जिससे यह विलुप्त हो गयी। यह नदी थोड़ा आगे बढ़कर अलकनंदा में मिलती है लेकिन ऐसा आभास होता है जैसे कि यह विलुप्त हो रही हो। इसके विलुप्त होने के पीछे एक और कहानी भी है।
गणेश जब महाभारत लिख रहे थे तो सरस्वती बड़ा शोर करते हुए बह रही थी। गणेश ने उससे शोर कम करने को कहा लेकिन सरस्वती नहीं मानी। इससे क्रोधित होकर गणेश ने सरस्वती को विलुप्त होने का श्राप दे दिया था।