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यहां नदी धर लेती है इंसान का रूप, तस्वीरें गवाह हैं...

Tue, 08 Nov 2016 11:56 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 08 Nov 2016 11:56 AM IST
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face reflects on saraswati river
saraswati river

महाभारत काल की कई घटनाओं से जुड़ा होने के कारण भारत के इस गांव को सबसे पुराना गांव माना जाता है। यहां बहने वाली पावन सरस्वती नदी इंसान का रूप धर लेती है। तस्वीरों में देखें...

face reflects on saraswati river
saraswati river

माणा गांव से थोड़ी दूर पर सरस्वती नदी है। यहां नदी तेज वेग के साथ बहती है। लेकिन पानी कम होने के बाद यहां अद्भुत नजारा दिखाई देता है।
 

face reflects on saraswati river
saraswati river

यहां पानी कम होने पर नदी में इंसान का चेहरा दिखाई देता है। जो अपने आप में अद्भुत दृश्य लगता है। इस नदी पर पत्थर से बना पुल है। इसे भीमपुल कहते हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्गारोहिणी के लिये आगे बढ़ रहे थे तो द्रौपदी सरस्वती नदी को पार नहीं कर पायी। पांडवों ने इसके बाद सरस्वती से रास्ता देने का आग्रह किया लेकिन सरस्वती नहीं मानी।
 

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face reflects on saraswati river
saraswati river

पांडवों में सबसे बलशाली भीम ने तब दो बड़े पत्थर लुढकाकर पुल बना दिया। भीम ने तब अपनी गदा जोर से सरस्वती नदी पर मारी थी जिससे यह विलुप्त हो गयी। यह नदी थोड़ा आगे बढ़कर अलकनंदा में मिलती है लेकिन ऐसा आभास होता है जैसे कि यह विलुप्त हो रही हो। इसके विलुप्त होने के पीछे एक और कहानी भी है।
 

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face reflects on saraswati river
saraswati river

गणेश जब महाभारत लिख रहे थे तो सरस्वती बड़ा शोर करते हुए बह रही थी। गणेश ने उससे शोर कम करने को कहा लेकिन सरस्वती नहीं मानी। इससे क्रोधित होकर गणेश ने सरस्वती को विलुप्त होने का श्राप दे दिया था।
 

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