ऊषा ने राम सिंह से अपने बेटे का राज छुपाया था। दोनों की शादी के करीब सात महीने बाद जब राम सिंह को पता चला कि ऊषा का अपना खुद का बेटा भी है और वह बदमाश करन शिवपुरी है तो वह उससे नफरत करने लगा।
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शिवपुरी के खिलाफ एक दो नहीं बल्कि 40 मुकदमे दर्ज हैं। ऊपर से ऊषा उसे संपत्ति का हकदार भी बताने लगी। इसी बात ने दोनों के बीच विवाद का बीज डाल दिया। बढ़ते-बढ़ते मामला इतना आगे आया कि अब ऊषा की मौत पर ही खत्म हुआ।
राम सिंह ने ऊषा से 2019 में शादी की थी। इसके कुछ समय बाद ऊषा ने राम सिंह से कहा कि उसके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है, लिहाजा उसे कुछ रुपये चाहिए। राम सिंह ने ऊषा को रुपये दे दिए। यह सिलसिला काफी दिनों तक चला। एक दिन राम सिंह के सामने सारा सच आ गया।
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हत्या के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पता चला कि जिस बेटे की चोट की बात ऊषा कह रही है वह तो जेल में है। ऊषा उसकी चोट के इलाज के लिए नहीं बल्कि उसकी जमानत की पैरवी को पैसे लेकर जाती है। उस वक्त करन शिवपुरी प्रेमनगर में सराफ के यहां हुई लूट के मामले में गोवा से पकड़ा गया था।
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हत्या के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
राम सिंह ने जब अपने स्तर से पड़ताल की तो मालूम हुआ कि उस पर एक दो नहीं बल्कि लूट और चेन लूट के 40 मुदकमे दर्ज हैं। वह सिरे का बदमाश है। उसने दिल्ली तक में लोगों का जीना मुहाल किया हुआ था। राम सिंह ने ऊषा को अपने बेटे से रिश्ता तोड़ने को कहा, लेकिन ऊषा ने राम सिंह की बात मानने के बजाय अपने बेटे के लिए संपत्ति में हिस्सा मांगने लगी।
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हत्या के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
करन शिवपुरी वर्तमान में भी सुद्धोवाला जेल में बंद है। वह हमेशा अकेले ही सारी घटनाओं को अंजाम देता था। वर्ष 2017 में उसने दिल्ली में एक ही दिन में सात चेन लूट की घटनाओं को अंजाम दिया था।
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बुजुर्ग ने की पत्नी की हत्या
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उसे पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने बाइकर्स का एक ग्रुप भी उसके पीछे लगाया था। मगर, करन शिवपुरी हर बार उत्तराखंड पुलिस के ही हत्थे चढ़ा। वह एक बार 2018 में और फिर 2020 में प्रेमनगर में लूट के मामले में गोवा से भी देहरादून पुलिस के ही हत्थे चढ़ा।