उत्तराखंड के रामनगर (भवानीगंज) में हुई सड़क दुर्घटना में मृत प्रधानाध्यापिका की अंत्येष्टि पोस्टमार्टम के बाद की गई। इस दौरान प्रधानाध्यापिका की बेटी ने मोहल्लेवासियों के साथ अर्थी को कंधा देकर शव का दाह संस्कार किया।
जानिए, ऐसा क्या हुआ कि श्मशान में मां के खून से तिलक कर बेटी ने कहा मैं बेटा हूं...
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बेटी ने अपने पिता को अर्थी पर हाथ तक नहीं लगाने दिया। इससे श्मशान घाट पर भी झगड़ा हो गया। पुलिस के पहुंचने पर मामले को निपटाया गया। इंदिरा कॉलोनी निवासी रानी सागर प्राइमरी स्कूल उदयपुरी चोपड़ा की प्रधानाध्यापिका थी।
शुक्रवार को स्कूटी से स्कूल जाते समय भवानीगंज में अज्ञात बाइक से हुई भिड़ंत में रानी की मृत्यु हो गई थी। पुलिस ने पंचनामा भर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था। बेटी नीतिका के अंबाला हरियाणा से लौटने पर पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को शव उसे सौंपा गया।
तब तक नीतिका के पिता हरीश चंद्र भी घर पहुंचे तो उसने शव को हाथ तक नहीं लगाने दिया और चिल्लाने लगी कि मेरा आप से कोई नाता नहीं है। आप यहां से चले जाओ, जबकि हरीश चंद्र अपनी पहली पत्नी के पुत्र को क्रियाकर्म के लिए लाया था।
दिन में जब शव को दाहसंस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तो मोहल्लेवासियों के साथ नीतिका ही अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक ले गई। श्मशान में बेटी ने मां के खून से तिलक लगाकर कहा कि मैं आपकी बेटी नहीं, बेटा हूं। आपके सारे क्रियाकर्म मैं ही करूंगी।