ड्रग्स, अपराध और आतंक का यह नया गठजोड़ समय रहते टूट गया, अन्यथा पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए आने वाला समय बेहद मुश्किल भरा होता। आतंकी समेत छह कैदियों को फरार कराने में भले ही पलविंदर का नाम आ रहा हो, लेकिन उत्तराखंड पुलिस प्रेमा उर्फ लवारिया को ज्यादा हार्ड क्रिमिनल मानकर चल रही है।
नाभा जेल ब्रेकः आतंकवादियों को भगाने वाले पलविंदर से खूंखार है उसकी साथी महिला
खालिस्तानी आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू का आतंकवाद, प्रेमा को डग्स कारोबार और पलविंदर को अपराध की दुनिया में दखल किसी से छिपा नहीं है। खुफिया तंत्र के सामने अब इस नेटवर्क को तोड़ने की चुनौती है। ऐसे में पंजाब से उत्तराखंड में नशा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।
पंजाब की नाभा जेल कांड में देहरादून का नाम जुड़ने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरे नेटवर्क पर माथापच्ची करने में जुटी है। जांच पड़ताल में एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। खुद अधिकारी भी इस आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं। नाभा जेल हमले का हर किरदार अपने फन में मास्टर है।
खुफिया सूत्रों की माने तो नाभा जेल पर हमले की साजिश में शामिल हर किरदार का मकसद तो साफ नहीं है, लेकिन दोनों हाथों से धन बटोरना बड़ा मकसद हो सकता है। स्वाभविक है कि आतंकी हरमिंदर सिंह की फरारी के बाद उनकी दिशा किसी से छिपी नहीं है। पंजाब के बाद उत्तराखंड में बढ़ते नशा कारोबार में इस नेटवर्क की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा सदानंद दाते भी मानते है कि ड्रग्स, अपराध और आतंक के गठजोड़ का यह नया टेंड़ चुनौती पूर्ण है। उसी गंभीरता से नेटवर्क को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। इस तथ्य पर गहनता से जांच कराई जा रही है कि पंजाब से तो नशे की तस्करी नहीं हो रही, क्योंकि प्रेमा और उसके साथी नौवा के नशा बाजार में पकड़ किसी से छिपी नहीं है। माना जा रहा है कि सुनील की गिरफ्तारी के बाद काफी हद तक धुंधली तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।