उत्तराखंड में कोरोना वायरस के प्रति लोग आतंकित नजर आ रहे हैं। ऋषिकेश में हालात यह है कि कोरोना वायरस के प्रति सबसे सुरक्षित माने गए मॉस्क एन95 शहर के प्रमुख मेडिकल स्टोर में खत्म हो खत्म हो चुके हैं। स्टोर संचालकों की मानें तो करीब सारे मास्कों की बिक्री हो चुकी है। साथ ही कंपनियों से इनकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मजबूरन लोगों को सादे मॉस्क खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। स्टोर संचालकों के अनुसार सादा मॉस्क धुलने के बाद भी उपयोग करने लायक है।
कोरोना वायरस के आतंक के चलते तीर्थनगरी के बाजारों में बड़ी संख्या में लोग मॉस्क पहनकर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। एन95 मॉस्क का सामान्यत: मूल्य 70 रुपये के करीब है। मगर कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए इस मॉस्क के रेट तीर्थनगरी के बाजार में तीन सौ रुपये तक पहुंच गए। स्थिति यह है कि तीन सौ रुपये में लोगों को मास्क नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोगों को सादे मास्क से ही काम चलाना पड़ रहा है।
कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए एन95 मास्क के साथ हैंड वॉश सैनिटाइजर की बिक्री भी मेडिकल स्टोरों में काफी बढ़ गई है। प्रत्येक मेडिकल स्टोर में यह करीब 40 रुपये तक मिल रहा है। कई जगह इसके दाम भी बढ़ गए हैं। वहीं, राज्यपाल ने भी सरकार को सैनिटाइजर की कालाबाजारी पर ध्यान देने के लिए पत्र लिखा है।
शहर के प्रतिष्ठित एक मेडिकल स्टोर संचालक विनोद कोठारी ने बताया कि वर्तमान में लोग कोरोना वायरस के आतंक से बचने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत पिछले कुछ दिनों से एन95 मास्क की बिक्री बहुत ज्यादा बढ़ गई है। कंपनियों को डिमांड भेजी गई है, मगर उनके पास भी मॉस्क उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि विदेशों में अधिक डिमांड होने के कारण इन कंपनियों ने एन95 मास्कों का निर्यात वहां कर दिया है।
कोरोना वायरस के आतंक को देखते हुए सरकारी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में बेडों की संख्या बढ़ा दी गई है। पूर्व में इस वार्ड में बेड़ों की संख्या चार थी। जो बढ़ाकर 12 कर दी गई है। यहां तैनात सिस्टर इंचार्ज दीपिका ने बताया कि सभी बेडों के पास ऑक्सीजन और इमरजंसी सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि चार अन्य बेड अधिक इमरजंसी के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।