हरिद्वार के तीनों मुक्तिधाम में कोरोना संक्रमित और संदिग्ध मरीजों के शव के अंतिम संस्कार में प्रयोग की जा रही पीपीई किटों को या तो खुले में फेंका जा रहा है या फिर उन्हें चिता के साथ ही जलाया जा रहा है। ऐसे में दोनों ही तरह से संक्रमण का खतरा है। इनके निस्तारण के लिए श्मशान घाटों में कोई इंतजाम नहीं है। कनखल श्मशान घाट में तो पीपीई किट, दस्ताने आदि चारों ओर बिखरे पड़े हैं।
कोरोना काल में अंतिम संस्कार के लिए कोविड और नॉन कोविड शवों के दाह संस्कार के लिए लाइनें लगी हैं। धर्मनगरी के कनखल, खडखड़ी और चंडी घाट स्थित श्मशान घाट पर प्रतिदिन 100 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इनमें कोरोना संक्रमण से मरने वालों के शव भी शामिल होते हैं।
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इस दौरान शवदाह के लिए आने वाले लोग अपने पीपीई किट और अन्य सामग्री यहां छोड़कर जा रहे हैं। यह सामग्री हवा में उड़कर आसपास के क्षेत्र में फैल रही है। आसपास स्थित घरों तक पहुंचने का भी खतरा है।
इससे लोगों में दहशत है। वहीं, शहर में संक्रमण और प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। खड़खड़ी और चंडी घाट श्मशान घाटों में पीपीई किट को चिता के साथ ही जलाया जा रहा है।
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हरिद्वार में खुले में फेंकी जा रही पीपीई किट
- फोटो : अमर उजाला
कनखल श्मशान घाट में पिछले तीन दिनों से अंतिम संस्कार गंगा पार हो रहे हैं, लेकिन श्मशान घाट के भीतर पीपीई किट कई जगहों पर पड़ी हुई रहती है। इसके साथ ही दस्ताने और अन्य सामान भी इधर-उधर फेंका जा रहा है। कनखल श्मशान घाट समिति के कोषाध्यक्ष हरिओम अनेजा ने बताया कि पीपीई किट को शाम होते ही श्मशान में लगा स्वीपर एकत्र करने के बाद जला देता है। लोगों को लगातार समझाया जा रहा है। मगर कोई मानता ही नहीं है।
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हरिद्वार में खुले में फेंकी जा रही पीपीई किट
- फोटो : अमर उजाला
खड़खड़ी श्मशान घाट में पीपीई किट को चिता के साथ ही जलाया जा रहा था। जबकि, दस्ताने इधर-उधर डाले जा रहे हैं। गर्म पानी की टोंटियों के स्लैब पर भी लोग दस्ताने टांग रहे हैं। शवों को जिन लकड़ी के बक्सों में लाया जा रहा, वह भी इधर-उधर डाल रहे हैं। खड़खड़ी श्मशान घाट के राजेंद्र सेवक ने बताया कि कोविड और नॉन कोविड शवों का अलग-अलग अंतिम संस्कार किया जा रहा है। लेकिन पीपीई किट को चिता के साथ ही जला रहे हैं।
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हरिद्वार में श्मशाम घाट
- फोटो : अमर उजाला
चंडी घाट के श्मशान घाट पर सफाई तो ठीक है, लेकिन पीपीई किटों को यहां भी चिताओं पर डालकर ही जला दिया जा रहा है। हालांकि, सफाई कर्मचारी लगातार सफाई में जुटे हैं। श्मशान समिति के सचिव मान सिंह गुंसाई ने बताया कि कुछ लोग खुद ही पीपीई किर उतारकर चिता में जला देते हैं। जो इधर-उधर फेंक देते हैं उनको एकत्र कर अलग से जलवाया जा रहा है।
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हरिद्वार में खुले में फेंकी जा रही पीपीई किट
- फोटो : अमर उजाला
श्मशान घाट में करीब एक पखवाड़े से बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमितों के शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। शवों का अंतिम संस्कार कर्मचारी ही पीपीई किट पहनकर कर रहे हैं। ये अंतिम संस्कार के बाद इस्तेमाल पीपीई किट श्मशान घाट के बाहर सड़क पर ही फेंक रहे हैं। मोक्षधाम के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने इस समस्या का समाधान कराए जाने की मांग की है।