उत्तराखंड में कोरोना : सामान्य मौत पर भी नहीं मिल रहे चार कंधे, मोबाइल से ही दे रहे सांत्वना
कोरोना काल में जब लोग संक्रमित आने वाले परिजनों और खास परिचितों को अस्पताल तक पहुंचाने में बचने की कोशिश कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इसे बेबसी कहें या मजबूरी या लोगों को कोरोना से बचाने की मंशा। कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे प्रसार और मौतों की संख्या में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी के चलते कई लोग सामान्य मौत पर भी मोबाइल के जरिए सांत्वना और श्रद्धांजलि देने की अपील कर रहे हैं।
हरिद्वार में नेता-अफसरों की हनक: अस्थि विसर्जन के लिए भी चाहिए वीआईपी प्रोटोकॉल
कोरोना काल में लोग संक्रमित आने वाले परिजनों और खास परिचितों को अस्पताल तक पहुंचाने में बचने की कोशिश कर रहे हैं। संक्रमित लोगों को छोड़िए सामान्य बीमारी से मौत पर भी कई लोगों को चार कंधे तक नसीब नहीं हो रहे हैं।
उत्तराखंड: शादी के दिन दुल्हन को हुआ कोरोना, फिर पीपीई किट पहनकर एक-दूजे के हुए भूपेंद्र और विनीता, तस्वीरें...
कोरोना संक्रमण के अलावा सामान्य मरीजों में भी कई लोग परिचितों से अनुरोध कर रहे हैं कि वह इस वक्त सांत्वना या श्रद्धांजलि के लिए भीड़भाड़ एकत्र न होने दें।
इस तरह की कर रहे हैं अपील
मृतकों के परिजन खुद परिचितों से अनुरोध कर रहे हैं कि मोबाइल संदेश के जरिए ही श्रद्धांजलि और सांत्वना दें। अखबारों में शोक संदेश के इश्तिहारों में भी वह इस तरह की अपील कर रहे हैं।
आरोग्यधाम अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विपुल कंडवाल का कहना है कि कोरोना काल में बहुत जरूरी न हो तो बाहर न निकलें, बल्कि घर में ही सुरक्षित रहें।
इससे कोरोना के प्रसार को कम करने में निश्चित तौर पर मदद मिलेगी। राजकीय जिला अस्पताल के गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में जितना हो सके भीड़भाड़ से दूर ही रहना चाहिए।
मास्क का इस्तेमाल जरूर करें और जरूरत के हिसाब से हाथों को सैनिटाइज करते रहें। हर आदमी को यह सोचना चाहिए कि जिंदगी रही तो समारोह या सुख-दुख में शामिल हुआ जा सकता है।