जन्माष्टमी पर इस बार तिथि, वार और नक्षत्र का मिलन नहीं हो पा रहा है। इसके चलते लोग असमंजस में हैं। आइए जानते हैं कब मनानी है जन्माष्टमी...
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कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बना असमंजस, यहां जानिए कब मनानी है जन्माष्टमी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:56 AM IST
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जन्माष्टमी
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देहरादून के मंदिरों में व्रत 14 अगस्त को होगा और पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा।
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वहीं ज्योतिषों के अनुसार रात्रि को अष्टमी व्यापिनी तिथि में ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है। इस हिसाब से 14 अगस्त को यह पर्व मनाया जाना चाहिए।
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पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पापियों को मुक्त करने के लिए कृष्ण रूप में अवतार लिया था। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि रोहिणी नक्षत्र में देवकी और वासुदेव के पुत्र रूप में कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण का जन्म बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि को हुआ था। जबकि इस बार बुधवार नहीं है। तिथि और नक्षत्र का मिलन भी नहीं हो पा रहा है।
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Janmashtami Special
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पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल के अनुसार जन्माष्टमी को स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय के लोग अलग-अलग ढंग से मनाते हैं। श्रीमद्भागवत को प्रमाण मानकर स्मार्त सम्प्रदाय चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाता है। वैष्णव सम्प्रदाय उदयकाल अष्टमी एवं उदयकाल रोहिणी नक्षत्र को जन्माष्टमी का त्योहार मनाता है। गृहस्थ लोग स्मार्त होते हैं। ये अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि में व्रत, उपवास करते हैं। भविष्य पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि एवं श्रीमद्भागवत पुराण आदि में इसका वर्णन मिलता है।