हल्द्वानी की रामलीला में दशरथ के पात्र को जीवंत करने सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह मंच पर उतरे। रघुवीर के पिता बने हरबीर ने राजा दशरथ की व्यथा, दुविधा और पुत्र वियोग के भाव को सजीव कर दिया।
जब सिटी मजिस्ट्रेट बने दशरथ भाव-विभोर हो गए दर्शक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंचन के समय संवाद नहीं था, लेकिन भाव और भंगिमा ने शब्दों की कमी को पूरा कर दिया। वैसे तो कई जन प्रतिनिधि भी रामलीला मंचन करते आए हैं, लेकिन शायद यह पहला मंचन होगा, जिसमें कोई प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुआ हो। सिटी मजिस्ट्रेट के ‘हल्द्वानी से विदाई’ (देहरादून स्थानांतरण) और उनके रामलीला में वियोग के प्रसंग के सम्मिलित भाव ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
दशरथ दरबार सजने के बाद राम के गुरु वशिष्ठ के सम्मान, दशरथ-कैकेयी संवाद हुआ। हरबीर सिंह ने सधे हुए कलाकार की तरह हाव-भाव से राजा दशरथ के मनोभाव को प्रकट किया।
वियोग के क्षण में कई लोगों की आंखें नम हो गईं। राम वनवास के बाद आज की लीला समाप्त होने पर आरती का कार्यक्रम हुआ। इस बीच रामलीला के संयोजक स्वामी रामगोविंद दास भाई जी ने सिटी मजिस्ट्रेट को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में ‘राजा दशरथ’ के साथ फोटो खींचवाने के लिए भीड़ लग गई। लोगों ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में सरकारी महकमों के कर्मी भी पहुंचे थे।