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चौरासी कुटिया: खंडहर में तब्दील हो रहा विश्व प्रसिद्ध आश्रम, महंगे टिकट के बावजूद देखरेख पर नहीं ध्यान

Sat, 14 Aug 2021 05:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 14 Aug 2021 05:51 PM IST
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Chaurasi Kutiya: the world famous ashram turning into ruins, watch photos
देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

विश्व प्रसिद्ध  बैंड बीटल्स के गुरु महेश योगी के आश्रम के रूप में जाना जाने वाला योगनगरी ऋषिकेश का नामचीन पर्यटन स्थल चौरासी कुटिया पर्यटकों को मायूस भी करता है। महंगे टिकट के बावजूद इस आश्रम में न तो विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं और न ही पर्यटकों की आंखों, दिल और दिमाग को सुकून देने वाली नैसर्गिक भव्यता। साठ साल पहले बना यह विश्व प्रसिद्ध आश्रम वर्तमान में पुरातत्व महत्व का पर्यटन स्थल लगता है। आश्रम की कुटियाएं और भवन देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। भवनों के भीतर सफाई नहीं है। हर तरफ गंदगी है। बीटल्स हॉल समेत विभिन्न भवनों और कुटियाओं की छतें टूट चुकी है। भवन और कुटियाओं के आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आईं हैं जिन्हें साफ नहीं किया जाता। आलम यह  है कि अब पर्यटकों को भवनों और कुटियाओं में घुसते हुए भी डर लगता है। आश्रम में घूमने आ रहे पर्यटकों के लिए शौचालय, पेयजल आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।


 

Chaurasi Kutiya: the world famous ashram turning into ruins, watch photos
देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 1961 में महर्षि महेश योगी ने राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 7.5 हेक्टेयर वन भूमि में चौरासी कुटिया आश्रम का निर्माण किया था। उन्होंने करीब 40 वर्षों के लिए वन भूमि को लीज पर लिया था। इस दौरान उन्होंने आश्रम में 140 गुंबदनुमा कुटिया और 84 छोटी-छोटी ध्यान योग की कुटिया व अन्य निर्माण किया था। वर्ष 1968 में इंग्लैंड का मसहूर बीटल्स ग्रुप के चार सदस्य जॉन लेनन, पॉल मकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार चौरासी कुटिया में ध्यान, योग करने के लिए आए थे।

Chaurasi Kutiya: the world famous ashram turning into ruins, watch photos
देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

ये लोग कुटिया नंबर नौ में ध्यान करते थे। वे यहां करीब चार महीने रुके थे। इन चार महीनों में उन्होंने यहां 40 गानों की धुन तैयार किया था, जिन्हें विदेशी आज भी मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं। वन भूमि की लीज समाप्त होने के चलते महर्षि महेश योग इस कुटिया को वर्ष 1989 में छोड़कर हॉलैंड चले गए। वर्ष 2000 में वन विभाग ने इस आश्रम को अधिग्रहण कर लिया।

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Chaurasi Kutiya: the world famous ashram turning into ruins, watch photos
देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

आठ दिसंबर 2015 को पार्क प्रशासन ने इस कुटिया को देशी, विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया। इसमें पार्क प्रशासन ने यहां देशी विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित शुल्क लगा दिया। बीते पांच वर्षों में यह कुटिया पार्क प्रशासन के लिए मील का पत्थर साबित हुई। पार्क प्रशासन ने यहां से करोड़ों रुपये का राजस्व वसूला। वर्ष 2015 में 2.52, वर्ष 2016 में 18.89, वर्ष 2017 में 20.33,  वर्ष 2018 में  50.51, वर्ष 2019 में 45.21, वर्ष 2020 से लेकर अब तक 24 लाख रुपये की आय हुई। 

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देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम - फोटो : अमर उजाला

प्रवेश शुल्क
भारतीय - 150 रुपये
विदेशी- 600 रुपये
वरिष्ठ नागरिक- 75 रुपये
18 वर्ष तक के छात्र- 40 रुपये
18 आयु वर्ग के ऊपर वाले छात्र -75 रुपये

चौरासी कुटिया को पूरी तरह से संजोने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए आश्रम परिसर में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साफ-सफाई की व्यवस्था को भी दुरुस्त कर लिया जाएगा।
-धीर सिंह, गौहरी रेंज अधिकारी, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क

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