चमोली के प्लांट में हादसे के बाद यूपीसीएल ने विद्युत सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर जांच कराई तो ट्रांसफार्मर की अर्थिंग दुरुस्त पाई गई, लेकिन प्लांट के भीतर जब जांच हुई तो पता चला कि निर्धारित मानकों से 18 गुना अधिक प्रतिरोध तक अर्थिंग थी। इसे हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।
Chamoil Accident: प्लांट के भीतर मानकों से 18 गुना तक प्रतिरोध की अर्थिंग, बड़े पैमाने पर सामने आई गड़बड़ियां
दूसरी ओर, प्लांट के भीतर की जांच के दौरान और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि प्लांट के भीतर पिट-1 की अर्थिंग प्रतिरोध 18 ओम, पिट-2 का अर्थिंग प्रतिरोध 14-15 ओम और फेंसिंग से पिट की अर्थिंग प्रतिरोध 11-12 ओम पाई गई।
दावों को सिरे से खारिज
नियामक आयोग के इलेक्ट्रिक सेफ्टी नियमों के हिसाब से अर्थिंग का ये प्रतिरोध एक ओम या इससे कम होना चाहिए था। ये प्रतिरोध अधिक होने की वजह से करंट अर्थिंग के माध्यम से नीचे नहीं गया। इसके बजाए प्लांट की मशीनों में ही घूमता रह गया और इतना बड़ा हादसा हुआ है।
ट्रांसफार्मर की अर्थिंग रॉड, ठेके का हिस्सा
यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमएल प्रसाद का कहना है कि हर ट्रांसफार्मर की अर्थिंग रॉड उसकी स्थापना के ठेके का हिस्सा होता है। यानी ठेकेदार जो भी ट्रांसफार्मर लगाता है, उसमें अर्थिंग अनिवार्य तौर पर की जाती है। उन्होंने बताया कि मीटर की एमआरआई रिपोर्ट भी नॉर्मल आई है।
ये भी पढ़ें..Kedarnath Dham: गर्भ गृह की फोटो खींचने पर सख्ती, तीर्थयात्री को मांगनी पड़ी माफी, 11 हजार अर्थदंड चुकाया