‘उत्तराखंड के निर्माण में जिन आंदोलनकारियों ने अपना खून-पसीना बहाया, उनसे सचिवालय सुरक्षा को खतरा है, बाकी कोई भी कैसे भी सचिवालय में घुस आए, सुरक्षाकर्मियों को कोई फर्क नहीं पड़ता’। इसी हफ्ते मंगलवार को प्रमुख आंदोलनकारी सुशीला बलूनी को बिना पास सचिवालय में घुसने से रोकने और शुक्रवार को बिना किसी पास, मोटरसाइकिल समेत सीएम कार्यालय के पोर्टिको तक एक युवक के घुसने की घटना का निहितार्थ क्या यह नहीं है?
अमर उजाला स्टेट ब्यूरो चीफ संजय त्रिपाठी, सचिवालय की लचर सुरक्षा व्यवस्था का चेहरा बेनकाब करने वाली, इस घटना के चश्मदीद हैं। उन्होंने जो कुछ देखा और कैमरे में कैद किया हूबहू पेश है। आप भी देखिए-पढ़िए... और सोचिए, ऐसी सुरक्षा व्यवस्था किस काम की, अगर वह युवक किसी खतरनाक इरादे से सचिवालय में दाखिल हुआ होता तो ?
तो सुनिए पूरी कहानी, संजय त्रिपाठी की जुबानी, शुक्रवार सचिवालय में शाम पांच बजे बाइक सवार एक युवक तेज रफ्तार के साथ जोर-जोर से चीखते हुए सचिवालय के भीतर घुस आया। वह सीधे सीएम कार्यालय के पोर्टिको पहुंचा और यहां एंट्री गेट पर बाइक खड़ी करके उसने जमकर तमाशा किया।
हतप्रभ करने वाली बात यह है कि जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी कार्यालय में मौजूद थे, उस समय सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था का यह हाल था। सुरक्षा व्यवस्था को धता बताने वाले इस युवक का नाम संतोष है और वह डोभालवाला का रहने वाला है।
संतोष सचिवालय में यूए-07-एस-1903 नंबर की काली पल्सर बाइक से दाखिल हुआ। सुरक्षा के लिए गेट पर तैनात गार्डों ने उससे पूछने की जहमत तक नहीं उठाई कि वह कहां जा रहा है और उसके पास एंट्री पास है या नहीं? तेज रफ्तार के साथ बाइक चलाता हुआ और चीखते हुए भीतर दाखिल हो गया, इसके बावजूद किसी गार्ड ने उसका पीछा करने या फिर वायरलेस पर अलर्ट करने तक की नहीं सोची।