बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के देहरादून पहुंचते ही कुछ ऐसा हो गया कि, भाजपा विधायक कांग्रेसी नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत की तारीफों के पुल बांधने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो नाराजगी जताते हुए भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि इस सरकार में तो अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं किया जा रहा है इससे अच्छी तो कांग्रेस की हरीश रावत सरकार थी।
अमित शाह के देहरादून पहुंचते ही हो गया कुछ ऐसा कि BJP नेता करने लगे कांग्रेस की तारीफ
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उनका कहना था कि रावत के समय यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता के बीच भी बैठा दिख जाता था तो मुख्यमंत्री खुद उसे हाथ पकड़कर मंच पर बैठा लेते थे लेकिन इस सरकार के समय में ऐसा नहीं हो रहा है। हालांकि बाद में इस कथन की पुष्टि किसी भी नेता नहीं की लेकिन नेताजी की इस टिप्पणी को लेकर देर तक चर्चा होती रही। दरअसल यह सब इसलिए हुआ कि विधायक सुरेश राठौर की गाड़ी को पुलिस ने एयरपोर्ट पर बाहर ही रोक दिया।
बाहर ही रोकने पर विधायक का गुस्सा पुलिस अधिकारियों पर फूट पड़ा। उन्होंने डीएम और एसएसपी के सामने अपने गुस्से का इजहार करते हुए नाराजगी जताई और अपनी पार्टी के जिलाध्यक्ष को भी खूब खरी-खरी सुनाई। बाद में जैसे-तैसे मामला शांत हुआ। अमित शाह जैसे ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडे के साथ हवाई मार्ग से हरिद्वार पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के साथ विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, संजय गुप्ता, आदेश चौहान आदि भी मौजूद थे। पुलिस ने स्वागत करने वाले नेताओं को क्रमबद्ध लाइन में लगवा दिया जिनमें विधायक भी शामिल थे।
इसी बीच पहुंचे ज्वालापुर के विधायक सुरेश राठौर की गाड़ी को एक पुलिस अधिकारी ने बाहर ही रुकवा दी। जब अमित शाह आए तो शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के साथ ही भाजपा के जिला महामंत्री विकास तिवारी और पूर्व जिला उपाध्यक्ष नरेश शर्मा भी क्रम तोड़कर आगे बढ़ गए जबकि विधायक पीछे ही खड़े रह गए। इस पर विधायकों का गुस्सा फूट पड़ा। अमित शाह के जाने के बाद उन्होंने जिलाधिकारी दीपक रावत और एसएसपी कृष्ण कुमार वीके के सामने अपनी नाराजगी जताते हुए जनप्रतिनिधियों के अपमान का आरोप भी लगाया।
क्रम तोड़कर राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत करने पहुंचे स्थानीय नेताओं के बारे में अपशब्द बोलते हुए एक विधायक ने कहा कि अधिकारी प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखते हैं। जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं किया जाना है तो उन्हें कार्यक्रम में आने से मना ही कर दिया जाए। काफी देर तक चली गहमा गहमी के बीच अधिकारियों ने समझाकर विधायकों को शांत किया। बाद में स्वामी यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता और सुरेश राठौर ने अमर उजाला को बताया कि अक्सर अधिकारी जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखते हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।